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Thursday, January 22, 2026

ज्यादा जोखिम मतलब ज्यादा मुनाफा या....

 आज बहुत दिन बाद, लगभग दो महीने के बाद, आज फिर आपके सम्मुख हूं अपने अनुभवों को साझा करने के लिए.

हर बार मैं यह पहले ही स्पष्ट कर देता हूं कि मैं न तो कोई रिसर्च एनलिस्ट हूं ना इन्वेस्टमेट एडवाइजर. मैं एक जिद्दी वणिक (trader) हूं जिसने पिछले बीस साल में लाखों का नुकसान उठाया है मगर फिर भी लगा रहता है.

आज मुझे गाइड फिल्म का वह गीत याद आ रहा  है -
वहां कौन है तेरा मुसाफिर जाएगा कहाँ?
दम ले ले घड़ी भर ये छइयाँँ पाएगा कहाँँ?


यह गीत मुझे यही सदेश देता लगता है कि हे वणिक, शेयर बाजार की तरफ क्यो जा रहा है? वहां तेरा है कौन? इसलिए थोड़ी देर यहीं विश्राम कर मेरी बात सुन. यह सब कुछ और कहाँ मिलेगा?

पर ऐसी जानकारियों से तो सारे सोशल मीडिया प्लेटफार्म भरे पड़े हैं. बहुतों के पास बहुत सी जानकारियाँ है जो वो आपको बताना चाहते है, पर उनमें से अधिकतर की मंशा यही होती है कि आप उनका ग्रुप ज्वायन कर लें और उनकी सलाह के अनुसार वणिकई (trading) कर के उन्हीं की तरह लाखों करोड़ों कमा लें. अलग बात है कि उनमें से बहुत सारे गुरु कम गुरुघंटाल ज्यादा होते है. कभी जब सेबी के दायरे में आते हैं तो पता चलता है कि इन्होंने ट्रेडिंग में तो नुकसान उठाया है पर ट्रेडिंग सिखाने के नाम पर करोड़ों जरुर कमाये है. 

मै कोई गुरु या गुरुघंटाल नहीं हूं. मैं आपकी ही तरह का एक वणिक हूं जो वणिकई से अपना खर्च निकालने की कोशिश कर रहा है. अलग बात है कि आज तक निकाल नहीं पाया हूं. फिर आखिर मै आपको बताना क्या चाहता हूं? यही कि कोई रणनीति (STRATEGY) , कोई इन्स्ट्रूमेंट (इक्विटी, आप्शन, कमोडिटी, करेंसी, क्रिप्टो वगैरह), कोई संकेतक (INDICATOR) ऐसी नहीं जिसमें नुकसान नहीं होता हो. ऐसा हो भी नहीं सकता, क्योंकि जिस दिन ऐसा हो गया वह दिन बाजार का अंतिम दिन होगा.

तो फिर एक वणिक करे क्या? हर सौदा (trade) एक लड़ाई की तरह होता है और वणिकई (trading) एक युद्ध की तरह. अधिक लड़ाई हारते हुए भी आप युद्ध जीत सकते हैं और अधिक लड़ाई जीतने के बाद भी आप युद्ध हार सकते हैं. अधिक सौदो में नुकसान उठा कर भी आप एक सफल वणिक हो सकते हैं और अधिकतर सौदों में लाभ उठाने के बाद भी आपकी वणिकई नुकसान दे सकती है. 

सबसे पहले तो आप यह मान लीजिए कि कुछ भी हो सकता है. आप जो भी संकेतक चाहें उसका उपयोग कर सकते हैँ, जो भी रणनीति बनायें उस पर काम कर सकते है. आपकी पसन्द सर्वश्रष्ठ होगी क्योंकि वह आपके हिसाब से होगी. आप सिर्फ उस तरह से सौदा करें जिसमें आप अगले दिन भी बाजार में उतर सकें. अपनी सारी पूंजी किसी एक सौदे पर, किसी एक इंस्ट्रूमेंट पर नहीं लगायें. अपनी नुकसान को छोटा रखें पर अधिक मुनाफे की चाहत भी मत करें. स्टॉपलॉस की तरह ही स्टॉपगेन भी आपके काम आएगा. अगर आपके पास पूंजी कम है, नियमित आय का स्रोत नहीं है  तो इन्वेस्टमेंट की मत सोचें. और अगर ट्रेडिंग करना है तो फिर सिर्फ ट्रेडिंग करिए. दोनों अलग अलग शैली हैं और दोनों को अलग अलग तरह से उपयोग में लाया जाता है. 

ट्रेडिंग के लिए आपको फंडामेंटल का जानकार होने से ज्यादा लाभकर होगा टेक्निकल जानकारी. कई बार व्हिमसिकल जानकारी भी काम कर जाती है ठीक उसी तरह जैसे कोई बन्द घड़ी दिन भर में दो बार सही समय बता देती है. 

मैं आप्शन ट्रेड करता हूं और वह भी खरीदार बन कर. जानता हूँ कि बिकवाल अधिकतर बार फायदे में रहते है. पर यह भी जानता हूं कि आप्शन सेलर या राइटर बनने के लिए पूंजी अधिक चाहिए होती है. इसमें लाभ की तो सीमा होती है पर नुकसान की कोई सीमा नहीं होती. जबकि आप्शन खरीदने के लिए कम पूंजी की जरुरत होती है. इसमें नुकसान की सीमा तय होती है - जितने में आपने आप्शन खरीदा वह पूरा का पूरा शून्य हो सकता है, पर उससे ज्यादा नुकसान नहीं हो सकता अगर आप इंडेक्स आप्शन खरीदते हैं. इक्विटी आप्शन खरीदना आपको बरबाद कर सकता है अगर आप उसे समय पर बेच नहीं पाते हैं तो. इंडेक्स आप्शन कैश में निपटाए जाते हैं सो इसमें जोखिम आपकी प्रीमियम से अधिक नहीं हो सकता. 

लोग कहते हैं कि आप्शन में थीटा, गामा, डेल्टा, वेगा वगैरह का ज्ञान होना जरुरी होता है. पर मैं नहीं मानता. इक्विटी में भी दाम किसी भी समय गिर सकता हे, गिरता उठता रहता भी है. आप जब कुछ खरीदते होते हैंं तो जरुरी होता है कोई आपको वह बेचने के लिए तैयार भी हो. यानि जब आपको लगता है कि इसका मूल्य बढ़ने वाला है तो उसी समय कोई यह सोच रहा होता है कि ना, अब इसका मूल्य गिरने वाला है. तभी वह सौदा होता भी है. 

आप्शन में बेचने वाला दीर्घकालिक योजना बना कर चलता है. क्योंकि उसे मालूम है कि समय के साथ इसका संभावना मूल्यांश (extrinsic value) घटते ही जाना है. पर आप्शन खरीदने वाले को इसी फिराक  में होना चाहिये कि जितनी जल्द हो सके उसे बेच दे. यह तो आपको भी पता होगा ही कि आप्शन प्रीमियम में दो अंश होते हैं - तात्कालिक मूल्यांश (intrinsic value) और संभावना मूल्यांश. उदाहरण कि लिए अगर कोई इंडेक्स 5000 पर चल रहा है और आप उसे 6000 पर बेचना चाहते हैं तो उस आप्शन का जो प्रीमियम होगा उसमें 1000 तो सीधे तात्कालिक मूल्यांश होगा और उसके ऊपर संभावना मूल्यांश. आप्शन बेचने वाला उसकी निपटान अवधि (settlement date or expiry date) की प्रतीक्षा में रहता है जबकि आप्शन खरीदने वाले की चेष्टा यही रहनी चाहिए कि जैसे ही काम भर मुनाफा मिले बेच कर निकल ले. अचानक से उछाल आए तो खरीदे नहीं और अचानक से गिरे तो बेचे नहीं. अगर अचानक और तेज उछाल आया है तो पुट आप्शन खरीदने की सोचिए, अचानक और तेज गिरावट हो तो कॉल आप्शन खरीदने की सोचिए. 

ध्यान रहे कि मैं सोचने की बात कर रहा हूं खरीदने या बेचने की नहीं. खरीदना या बेचना आपकी रुचि पर आपके विचार पर है. 

अगर आप कोई संकेतक या रणनीति  चाहते हैं तो नीचे कमेंट लिख दीजिए. मैं आपको हजारों संकेतक सैकड़ों रणनीति में से कोई भी एक बता सकता हूँ और सबके सब में मुनाफा या नुकसान की कमोबेश  एक बराबर संभावना होगी. आप युद्ध जीतना चाहते हैंं तो छोटी छोटी लड़ाई हारते रहिए और छोटी छोटी जीत लेते रहिए. कम से कम एक सौ सौदे करने के बाद ही फैसला लीजिए कि यह रणनीति सही है या गलत. एक बार फिर दोहरा देता हूं कि मुनाफा आपके अनुशासन पर निर्भर करेगा, आपके खुद के डर और लालच की सीमा पर निर्भर करेगा. क्योंकि ज्यादा जोखिम मतलब ज्यादा मुनाफा और ज्यादा मुनाफा मतलब ज्यादा जोखिम !

चलते चलते यह भी बता देना चाहता हूं कि पुट सेल करना या कॉल खरीद लेना एक जैसा ही होता है और कॉल सेल करना या पुट खरीदना भी एक जैसा ही होता है. खरीदने वाले के लिए लाभ कि कोई सीमा नहीं और बेचने वाले के लिए नुकसान की कोई सीमा नहीं. सेलर चूंकि ज्यादा जोखिम लेते हैं सो उनको मुनाफा भी अधिक होता है. और आप्शन खरीदने वाले चूंकि ज्यादा मुनाफा चाहते हैं तो उनके लिए जोखिम भी ज्यादा होता है. बात समझ में आ गई हो तो बधाई  और शुभकामनाऐं. अगर समझ में नहीं आई तो दुबारा पढ़िए, कमेंंट में सवाल लिखिए.

Monday, November 24, 2025

शेयर बाजार का क ख ग

 शेयर बाजार का क ख ग




मुझे गलतफहमी थी कि आज के युग में हर व्यक्ति को शेयर बाजार की आवश्यक जानकारी है. परन्तु एक व्यक्ति ने मेरी गलतफहमी दूर कर दी. आज के लेख में मैं अपने को शेयर बाजार के लिये व्यवहृत होने वाले कुछ शब्दों की परिभाषा तक सीमित करूंगा.

शेयर बाजार को हिन्दी में प्रतिभूति बाजार भी कहा जाता है. इस बाजार में कम्पनियों की हिस्सेदारी खरीदी या बेची जाती है. कंपनियाँ अरबों खरबों की हो सकती हैं पर उनुका  एक लघुतम हिस्सा बहुत कम पूंजी में खरीदा जा सकता है. इसी हिस्से को शेयर कहा जाता है. कंपनी की मौजूदा कीमत को उसके शेयरों की संख्या से विभाजित कर के शेयर का दाम निकाला जाता है. और शेयरों के वर्तमान मूल्य को शेयरों की कुल संख्या से गुणा कर के कंपनी का बाजार मूल्य या मार्केट कैपिटल निर्धारित होता है. 

भारत के शेयर बाजार को नियन्त्रित करने वाली संस्था है सेबी SEBI. इसका पूरा नाम भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड Securities and Exchange Board of India है. सेबी देश के प्रतिभूति बाजार पर नजर रखती है और इसे नियमित करती है. 

देश में तीन मुख्य शेयर बाजार हैं - नेशनल स्टॉक एक्सचेंज, बम्बई स्टॉक एक्सचेंज, और मेट्रोपोलिटन एक्सचेंज ऑफ इंडिया. और शेयर बाजारों में शामिल हैं - मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज, नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिभ एक्सचेंज, तथा इंडिया इंटरनेशनल एक्सचेंज. 

कई तरह की प्रतिभूतियों में खरीद बिक्री होती है जैसे कि कंपनियों के शेयर, कमोडिटी, करेंसी, क्रिप्टो, बुलियन, बॉण्ड वगैरह. मगर हमलोग अधिकतर इक्विटी (कंपनी शेयर) और उनके डेरिवेटिभ में ट्रेड करते हैँ. कुछ लोग करेंसी (फॉरेक्स), कमोडिटी (कपास, कच्चा तेल, फसल वगैरह) , बुलियन (सोना चाँदी), या क्रिप्टो करेंसी भी ट्रेड करते हैं.

शेयरों की सीधी खरीद बिक्री इक्विटी ट्रेड कही जाती हैँ. इन इक्विटी के आधार पर इनके डेरिवेटिभ जैसे कि फ्यूचर और आप्शन में भी बड़े पैमाने पर ट्रेड किया जाता है. 

शेयरों या प्रतिभूतियों की खरीद बिक्री एक्सचेंज पर होती है. एक्सचेंज ब्रोकरों से जुड़ा होता है और ट्रेड करने वाले इन ब्रोकरों से. देश के मशहूर ब्रोकरों में जिरोधा, ग्रो, पेटीएम मनी, आईसीआईसीआई सिक्यूरिटीज, एचडीएफसी सिक्यूरिटिज, एचडीएफसी स्काई वगैरह के नाम लिये जा सकते हैँ. इनके अलावा भी बहुत से ब्रोकर हैं. 

शेयर खरीदने या बेचने वाले अपने पसन्द के ब्रोकर के यहाँ खाता खोलते है. ब्रोकर आपकी पहचान सुनिश्चित करने के लिये आपका फोटो, आधार कार्ड, पैन कार्ड, हस्ताक्षर, और आपके बैंक खाते की जानकारी लेता है. शेयरों की खरीद बिक्री नकद नहीं हो सकती. रुपया आपके बैँक खाते से निकलेगा या  उसी खाते में जमा होगा. ब्रोकर आपका डीमैट खाता खोल देता है जहां आपके द्वारा खरीदे गये शेयर या प्रतिभूति रखे जाते हैं. जब आप इसे बेचते हैं तो वहीं से इन्हें निकाल लिया जाता है. डीमैट खातों का संचालन करने वाली संस्थाऐं हैं  National Securities Depository Limited (NSDL) और Central Depository Services Limited (CDSL). आपके द्वारा खरीदे गये शेयर ब्रोकर के पास न होकर इन डिपोजिटरीज में रखे जाते हैँ और ब्रोकर आपके शेयरों का गलत उपयोग नहीं कर सकते. जब आप अपने ब्रोकर से मार्जिन मनी लेते हैँ तो उसके लिये आप इन शेयरों को उनके नाम गिरवी pledge रख देते हैँ. इस प्रक्रिया के लिये डिपोजिटरीज सीधे आपसे स्वीकृति प्राप्त करती हैं. इस तरह आपका निवेश और पूंजी पूरी तरह सुरक्षित रहती है. इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी सेबी करता है. 

एक बार जब आपका डीमैट खाता खुल जाता है तब आप अपने ब्रोकर के एप या वेबसाइट पर जा कर शेयरों को खरीद या बेच सकते हैँ. 

शेयर तीन तरह से खरीदे बेचे जाते हैँ. डिलिवरी, इन्ट्राडे, और एमटीएफ के तहत. 

डिलिवरी में जब आप कोई शेयर खरीदते हैं तो आपको उसका पूरा मूल्य ब्रोकर को देना होता है और आपके खरीदे शेयर अगले दिन या दूसरे दिन आपके डीमैट खाते में आ जाते हैं. इन खरीदे गये शेयरों को आप उसके बाद ही बेच सकते हैं. पर कुछ ब्रोकर आपको आज खरीदो कल बेच दो वाली सुविधा भी देते हैं जिनका उपयोग कर आप इन शेयरों को डिलिवरी से पहले भी बेच पाते हैं. सामान्यतया डिलिवरी में खरीदे  गये शेयर उसी दिन बेचे नहींं जा सकते. डिलीवरी में जब आप कोई शेयर बेचते हैं तब वे शेयर आपके डीमैट खाते में उपलब्ध होने चाहिये. डिलीवरी में बेचे गये शेयरों को उसी दिन खरीदा नहीं जा सकता.

इन्ट्राडे में खरीदे या बेचे गये सौदों को उसी दिन बाजार बन्द होने से पहले निपटा लेना होता है वरना आपका ब्रोकर बिना आपकी परवाह किए उस सौदे को निपटा सकता है और इस प्रक्रिया में होने वाले नुकसान की भरपाई आपको करनी पड़ती है. 

मार्जिन पर खरीदे या बेचे गये सौदों का निपटान अपनी सुविधा या इच्छा से उसी दिन या बाद में भी किसी दिन कर सकते हैं. मार्जिन पर खरीदे गये शेयरों का मार्जिन अगर आपके ब्रोकर द्वारा दिया जाता है तो ब्रोकर आपसे उसका ब्याज वसूलता है. साथ ही प्रतिदिन इस मार्जिन को तय किया जाता है और अगर मार्जिन कम पड़ रहा हो तो आपको मार्जिन कॉल आयेगा और आपको तुरत वह  कमी दूर करनी पड़ेगी. अगर आप मार्जिन  की कमी पूरी नहीं कर पाते तो  आपका ब्रोकर आपका शेयर बिना पूछे बेच देगा और उससे होने वाले नुकसान की भरपाई भी आपको ही करनी होगी.

खरीदने या बेचबे के लिये शेयरो का चुनाव दो तरीको से किया जाता है. फंडामेंटल और टेकनिकल. फंडामेंटल विश्लेषण के लिये संबंधित कंपनी के काम, उसके मैनेजमेंट, उसकी वगैरह का निरीक्षण किया जाता है. यह विश्लेषण हर आदमी नहीं कर पाता. सो उनके लिये टेकनिकल विश्लेषण काम आता है. इस टेकनिकल विश्लेषण में शेयरों के मूल्य में आने वाले उतार चढ़ाव को देखा जाता है. इसे अधिकतर लोग कैंडल चार्ट देख कर करते हैं. मगर कैंडल का अलावा दूसरे तरीके भी होते हैं जैसे कि रेंको चार्ट, रेंज बार, कागो, लाइन चार्ट वगैरह,
कँडल चार्ट सबसे अधिक उपयोग में लाया जाता है.
 
टाइमफ्रेम का अर्थ होता है कि आप किस अवधि के कैंडल का उपयोग कर रहे है. कैन्डल चार बिन्दुओ   बनता है. पहला बिन्दू उस समयावधि में शुरु का मूल्य, अधिकतम मूल्य, न्यूनतम मूल्य, और आखिरी मूल्य के आधार पर कैंडल बनते हैं. इसे ओपन, हाई, लो, और क्लोज के नाम से भी जाना जाता है. स्वाभाविक है कि हर समयावधि में ये बिन्दू अलग अलग जगहों पर बनेंगे और हर समयावधि का कैडल अलग अलग हो सकता है.

टाइमफ्रेम का चयन ट्रेडिंग के तरीकों के आधार पर किया जाता है. अगर आप लगातार चार्ट देख सकते हैँ और आपको स्काल्पिंग या डे ट्रेडिंग करना हो तो यह समयावधि छोटी होती है. स्विंग पोजिशनल बाइ एंड होल्ड ट्रेडिंग में यह समयावधि सामान्यतया लंबी  रखी जाती है. जितने लबे समय तक आप इसे रखना चाहते हैँ उसी के अनुरुप समयावधि कम या अधिक रखी जाती है. 

स्काल्पिंग ट्रेडिंग बहुत कम अवधि के चार्ट के आधार पर की जाती है. इसके लिये सामान्यतया 1 मिनट से 3  मिनट तक की  अवधि चुनी जाती है. स्काल्पिंग करने के लिये बहुत अधिक पूंजी, तकनीकि दक्षता, और तीव्र गति से निर्णय लेने की क्षमता अनिवार्य जैसी होती है. 

डे ट्रेडिंग में एक ही दिन में शेयरों की खरीद बिक्री कर दी जाती है. इसके लिये अधिकतर लोग 5 मिनट से 25 मिनट तक का चार्ट देखते हैँ. 1, 3, 5, 15, 25 मिनट वाले चार्ट चुनने का एक कारण यह भी होता है कि हमारे देश में शेयर ट्रेडिंग सुबह 9:15 से अपराह्न 3:30 के बीच किया जाता है. यह अवधि कुल 375 मिनट की होती है जिसे 1,3,5,15, 25 से बराबर अवधि में विभाजित किया जा सकता है. 2, 4, 10 मिनट या अलग की अवधि में 375 को बराबर बराबर नहीं बाँटा जा सकता. और इसके कारण इंडिकेटरों के उपयोग में थोड़ा बहुत अन्तर आ जाता है. 

स्विंग ट्रेडिंग में नीचे के मूल्य पर खरीद कर उपर के मूल्य पर बेच दिया जाता है. यह झूले की तरह होता है. एक तरफ से आता है फिर दूसरी तरफ जाता है. इसलिये जब निचले स्तर पर मूल्य आने पर लोग खरीद लिया करते हैँ और जब मूल्य उपरी सीमा तक चहुँपता है तो बेच दिया जाता है. यह उदाहरण सिर्फ इसलिये दिया गया है कि आम ट्रेडर शॉर्ट सेल नहीं कर सकता, या उसे करने नहीं दिया जाता क्योंकि शॉर्ट सेलिंग बहुत जोखिम वाला काम होता है. 

लांग बाई उसको कहते हैं जब आपके पास पूंजी कम होती है ओर खरीदे गये शेयरों का मूल्य अधिक होता है. इस कमी को ब्रोकर आपको मार्जिन देकर पूरा कराते है.
शॉर्ट सेल उसको कहते हैं जब आपके पास शेयर नहीं होते फिर भी आप उसे बेच देते हैं. 

मान लीजिये कि आपने 1000 रुपये के शेयर लांंग बाई किया है और खरीदने के बाद इसका मूल्य नीचे जाने लगता है तब आपका अधिकतम नुकसान 1000 रुपये तक का ही होगा. जबकि लाभ की सीमा नहीं होती. मूल्य कितना भी बढ़ जाय. मगर यदि आपने उस शेयर को 1000 रु में बेच दिया है जो आपके पास है ही नहीं तब आपको अधिकतम लाभ 1000 रुपये तक का ही हो सकता है मगर नुकसान असीम हो जाता है क्योंकि उस का मूल्य किसी सीमा तक चढ़ सकता है. 

फ्यूचर और आप्शन के आप्शन ट्रेड में बिकवाल कॉल आप्शन बेचते हैं जबकि लिवाल पुट आप्शन. इसके ठीक उलट आम वणिक या ट्रेडर आप्शन खरीदता है. आप्शन बेचने वाले को असीम नुुकसान हो सकता है पर अधिकतम लाभ उतना ही होगा जितने पर उसने वह आप्शन बेचा है. जबकि आप्शन खरीदने वाले के लिये अधिकतम नुकसान उतना ही हो सकता है जितने पर उसने वह आप्शन खरीदा है जबकि उसके लाभ की कोई सीमा नहीं होती. 

सवाल उठता है कि तब अधिकतम आप्शन खरीददार नुकसान में कैसे रहते हैं और अधिकतम आप्शन विक्रेता मुनाफे में? वह इसलिये कि आप्शन की कीमत गुजरते समय के साथ घटती जाती है. मान लीजिये कि किसी ने 25000 स्ट्राइक रेट का आप्शन बेचा है तो यदि मूल्य उसके नीचे गिरता है तो बेचने वाला फायदे में रहता है. और यदि मूल्य स्थिर रह गया तब भी आप्शन का मूल्य घटता जाता है और बेचने वाला फायदे में रहता है. जबकि आप्शन खरीदने वाले के लिये यह इस के विपरीत होता है.  

कैंडल चार्ट के विश्लेषण के लिये तरह तरह के संकेतक यानि  इंडिकेटर उपयोग में लाये जाते है. हर इंडिकेटर का वर्णन इस लेख की सीमा के बाहर है. मगर इतना हमेशा याद रखिये कि आजतक कोई इंडिकेटर ऐसा नहीं बना है जो हर बार सही साबित हो. दुर्भाग्य से अगर ऐसा कोई इंडिकेटर बन गया तो शेयर बाजार का वह आखिरी दिन होगा. इसलिये हर इंडिकेटर कई बार सही होता है और कई बार गलत. 

इसीलिये वणिक यानि कि ट्रेडर तरह तरह की रणनीति - स्ट्रेटेजी - बनाते हैं. इनके साथ भी वही बात सही है जो इंडिकेटरों के लिये. कोई भी रणनीति हर बार सफल नहीं होती, हो भी नहीं सकती. 

इसलिये आप कोई भी इंडिकेटर - संकेतक - चुनिए, कोई भी रणनीति बनाईए आप हमेशा सही साबित नहीं हो  सकते. 

इसी लिये वणिक रिस्क रिवार्ड अनुपात की बात करते हैँ. यह रिस्क रिवार्ड अनुपात भी हर वणिक के लिये अलग हो सकता है, अलग होना भी चाहिये. अगर  आप असफल होकर एक रुपये का नुकसान उठाते हों और सफल होने पर एक से ज्यादा का मुनाफा होता है तो अधिक बार गलत होकर भी आप फायदे में रह सकते हैं. मगर अगर आपने गलत रिस्क रिवार्ड अनुपात का चयन किया है तो आपको नुकसान होने की संभावना ज्यादा होती है. 

आज का लेख कुछ लंबा हो गया और फिर भी सारी बातें चर्चा में नहीं आ पाईं. हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता वाली शैली में कहें तो शेयर बाजार एक अबूझ पहेली है. 

आप अपने प्रश्न पूछिए. कोशिश करुंगा कि आपको उत्तर दे पाऊँ. पर आपके हर प्रश्न का उत्तर मैं नहीं दे पाऊँगा क्योंकि बहुत से प्रश्न ऐसे हैं जिनका उत्तर मैं स्वयं खोज रहा हूं. मैं आपको कोई सलाह नहीं देता, दे भी नहीं सकता क्योंकि स्वंय लाखों का नुकसान उठा चुका हूँ और मैं न तो प्रशिक्षित और प्रमाणित विश्लेषक हूं न सलाहकार. क्या खरीदें क्या बेचें, कब खरीदें कब बेचें यह सब आप जानिए. जानने की कोशिश करिए. पूंजी आपकी होगी, फैसला आप का होगा, और लाभ हानि भी आपकी ही होगी.

हर वणिक को अपनी शैली बनानी पड़ती है कि किस संकेतक का उपयोग करेगा, किस रणनीति का उपयोग करेगा, किस तरह की ट्रेडिंग करेगा. जो मेरे लिए सही है वह आपके लिए भी सही ही हो इसकी संभावना बहुत कम होती है. सत्य एक ही है पर विद्वान उसका अलग अलग वर्णन करते है. विप्र बहुधा वदन्ती !

Thursday, October 2, 2025

वणिकों का सबसेे घातक दुश्मन : आशा

 वणिकों का सबसेे घातक दुश्मन : आशा
HOPE-WORST-ENEMY-OF-TRADERS


वणिकों का सबसेे घातक दुश्मन उनकी आशा होती है और यह जानते हुए भी अधिकतर वणिक - ट्रेडर - स्टॉक ट्रेडर - उसी आशा से चिपके रहते हैं इस उम्मीद मेे कि शायद उनको नया जीवन मिल जाय.

मैं हर बार बताता हूं कि मैं न तो निवेश सलाहकार हूं न अनुसंधानकर्ता न विश्लेषक. और मैं कोशिश करता हूं कि कभी किसी चरचा में किसी स्टॉक विशेष का नाम न लूं. फिर भी कुछ मित्र परिचित गाहे बगाहे मेरी सलाह मांगते ही रहते है. शायद उनको लगता है कि मैं एक अनुभवी वणिक हूं और मैं हर स्थिति से गुजरा हुआ हूं. वो जानना चाहते हैं कि उनुका एक ट्रेेड बहुत ही गलत चला गया है और वह उससे निकलने या निपटने में मेेेरे विचार जानना चाहता हूं. यह सारी चरचा अनौपचारिक होती है और इसमें कोई लेनदेन नहीं होता. अधिकतर मामलों मेें जिस स्टॉक के बारे मेें राय मांगी जाती है उस स्टॉक विशेेष में मैं सक्रिय नहीं होता. कई बार तो उस स्टॉक का नाम भी पहली बार सुन रहा होता हूं. 

हर वणिक अपना सबसेे बड़ा दुश्मन स्वंय होता है. उसेे अच्छी तरह याद रहता है कि शिकारी आएगा, जाल बिछाएगा, लोभ से उसमें फंंसना नही. और वह उस सलाह को दुहरातेे हुए किसी न किसी जाल मेें फँसता रहता हैै. आज तक ऐसा कोई वणिक नहीं हुआ जिसनेे नुकसान न उठाया हो. शेयर बाजार का शाश्वत सत्य ही यही है कि बाजार में कुछ भी कभी भी हो सकता है. कबीर जैैसेे लोग भी कहतेे आए हैं कि डूबा वंश कबीर का उपजा पूत कमाल. अलग बात है कि कमाल मेंं भी संभावनायें होती हैं. और उसकी सलाह भी बहुत काम की मिलती है. जैसेे कि - 
चलती चक्की देेख कर हँसा कमाल ठठाय,
कील पकड़ कर जो रहेे कभी ना पीसा जाय.

हर वणिक अगर कील से - बाजार की धुरी सेे, खुद की बनाई रणनीति सेे - चिपका रहे तो अंततोगत्वा उसकी जीत ही होती हैै. मगर वह अक्सर अपनी रणनीति को नजरअंदाज कर देता है  और बाद मेें सोचने लगता हैै कि इस जाल सेे निकलेे कैसेे!

आगे बढ़ने सेे पहलेे इस तथ्य को रेेखांकित करना जरुरी है कि ऐसा होता क्यों है. उसेे लगता हैै कि वह हमेशा सही रहता हैै (रहता नहीं पर उसेे अपनी गलतियां याद नहीं रहतीं अपना सही होना याद रहता हैै) और इस बार भी वह सही ही साबित होगा. उसका इगो उसे वास्तविकता स्वीकार करने सेे रोक देता है और वह अपनी आशा से चिपक जाता है कि बस अब बाजार पलटने ही वाला है, इस कैंडल मेेंं  नहीं तो अगलेे कैंडल में. बाजार पलटता नहीं और वणिक अपने ही बनाए दलदल मेें लगातार धँसता चला जाता है.

किसी भी गलत सौदे से निकलने या निपटनेे का एक ही तरीका होता है - अपनी गलती मानो और सौदा तोड़ दो! जितनी जल्दी स्वीकार कर सको और सौदा काट सको उतना ही बढ़िया. आशा उम्मीद वणिक के लिये जहर होती हैै. और यह जहर जैसेे जैसे अपना असर बढ़ाता जाता है वैैसे वैसे वह इस जहर की खुराक बढ़ाता जाता हैै. 

जो वणिक इस वास्तविकता को स्वीकार कर लेता है वह अंत मेेें विजयी हो कर निकलता हैै. क्योंकि हर सौदा ट्रेेड नहीं हुआ करता. कई सौदेे मिल कर ट्रेेेड बनते हैं. कई बार दस में से तीन बार ही सही रहनेे वाले वणिक भी बहुत लाभ कमा लेतेे हैं और अधिकतर सही रहनेे वाला वणिक नुकसान मेें रहता है. अंतर यही है कि पहली तरह का वणिक अपने दंभ में नहीं रहता, आशा के भरोसेे नहीं रहता. जैसे ही उसेे सौदा गलत होनेे का आभास होता है वह सौदा तोड़ देता हैै. दूसरी तरह का वणिक ऐसा नहीं कर पाता और अपने गलत हो चुके सौदे सेे चिपका रह जाता हैै.

कई वणिक नुकसान उठाने को तैयार नहीं हो पाते. वह चाहते हैं कि कोई ऐसा उपाय हो जिससेे इस नुकसान को कम किया जा सकेे. उसे हर सौदा जीतना होता हैै भले इस क्रम में वह अपने ट्रेेड में गलत साबित हो जाय!

और आज ऐसेे ही सौदे सेे सही सलामत निकलनेे की प्रक्रिया की चरचा करने जा रहा हूं इस लेेख में. पूरा पढ़िए और अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दीजिए. 

मैैंने आज ऐसे ही किसी स्टॉक को गूगल किया तो एक उदाहरण मेेरे सामने आया. इस स्टॉक का नाम मैंने कभी नहीं सुना था और शायद आप भी नहीं जानतेे होंगे. आज मैं उस स्टॉक का चार्ट तो दिखलाऊंगा पर उसका नाम नहीं बताऊंगा. यह एक वास्तविक चार्ट और एकदम ताजा. आज तक का ही है. यह स्टॉक ऐसेे गलत सौदों का एक सटीक उदाहरण हैै. सबसेे पहलेे तो इसका शुरु सेे आज तक का चार्ट देखिए. फर्श सेे शुरु होकर इसको कितनी तेजी से अर्श तक पहुँचाया जाता हैै वह भी देख लीजिए. एक नया नया लिस्टेेड शेयर महीनों तक अपर सर्किट मेे फसा रहता है और नये नये लोग इसका सौदा करतेे चले जाते हैैं. मगर जिस खिलाड़ी नेे या जिन खिलाड़ियों नेे यह खेल शुरु किया था उन्हें अच्छी तरह मालूम था कि कहां निकल जाना है. उसके बाद जो होता है वह भी आपके सामने है. इस चार्ट को दो हिस्सों मेे देखिए. पहला भाग पहली पहाड़ी मेें नजर आता हैै. 


पर असल खेेल दूसरेे चरण मेें खेेला जाता है. लोगों कि इस खंडहर का अतीत याद रहता है और उन्हें लगता है कि यह फिर अपना शिखर छू ही लेगा. और जब दूसरी बार यह खेल शुरु होता हैै तो इस बार बड़ेे बड़ेे वणिक (हो सकता है कि बड़ा वणिक होना उनका भ्रम ही हो) भी इसमे फँस जाते हैं. दूसरों की सलाह पर ट्रेड करने वाले तो फँसने केे लिए होतेे ही है. 

इस दूसरी पहाड़ी का ढलान जब अंत होता नहीं नजर आता तब सोचने लगता है कि कहां फँस गया! अब इससे निकलूं कैैसेे? दो चार दस फीसदी का नुकसान लेकर निकल जाना होता तो निकल भी जाते पर जब नुकसान साठ सत्तर फीसदी का हो तो हिम्मत नहीं हो पाती. और इसके कई उदाहरण भी बाजार मेें दिखते रहते है कि आप जैैसेे ही इस स्टॉक सेे निकलतेे हैं यह उड़ान भरना शुरु कर देता है!


आज इस लेख में मैै इसी स्थिति की चरचा करने जा रहा हूं. जब भी ऐसी स्थिति बन जाय कि आप भी मानने लगें कि इस सौदे मेें फंस गया हूं तो जितनी जल्दी निकल जाईए उतना ही अच्छा. पर अगर आप चाहते हों को आप अपनी पूरी पूंजी भी बचा लेें और इससेे मुक्ति भी पा लेें तब आपको हर उछाल में बेचना और बाद मेें आनेे वालेे गिरावट में खरीद लेनेे का क्रम चलाना पड़ेेगा. जब भी उछाल केे बाद गिरावट मिलेे पूरा सौदा काट दीजिए. पर इस सौदे को भूलिए मत. जब दुबारा गिर कर नये उछाल की तइयारी करेे तब इसेे फिर खरीद लीजिए. बेचने से जितनी राशि मिली थी उस पूरी राशि का उपयोग खरीदनेें मेें करना होगा. स्वाभाविक है कि आपने जितनेे शेयर बेेचे होंंगे उससेे कुछ न कुछ अधिक शेयर खरीद लेेने की स्थिति बनेगी. और यह अतिरिक्त शेयर ही आपका लाभ होगा. हर उछाल केे बाद पूरा सौदा काटिए और जब उछाल के संकेत मिलें तब पूरी राशि से शेेेयर खरीद लेें. इस क्रम में हर गिरावट पर आपके खरीदे शेेयरों की संख्या बढ़ती जाएगी और हर उछाल में राशि की!

 
यह अंतिम उपाय की तरह है. मरता क्या नहीं करता. सब कुछ करियेे पर एवरेजिंग नहीं करिये. उछाल पर बेचनेे के बाद गिरावट में खरीदते समय बढ़ते शेेयर एवरेेजिंग मेें नहीं आते. यह आपके सेेल सेे मिलने वाला लाभ है. अगर इस उपाय सेे काम नहीं बना तब भी एक काम तो बन ही जाएगा कि आपके खाते में  नुकसान बड़ा हो जाएगा पर आपकी कुछ डूबी हुई पूंजी वापस भी मिल जाएगी. इस नुकसान का उपयोग अपने बाकी सौदों सेे मिलने वालेे लाभ पर लगने वाला टैक्स बचानेे मेें हो जाएगा.  आम के आम और गुठली के दाम!




Sunday, August 10, 2025

आइए आपको एक अच्छी रणनीति बताते हैं...

 बहुत निराशा होती है जब बहुत प्रयास के साथ कोई नया ब्लॉग लिखता हूं पर आपमें से किसी की कोई टिप्पणी नहीं आती कि लेख कैसा बना है? कहां क्या कमी नजर आ रही है? आपको चाहिये क्या? आप किस बारे में ब्लॉग पढ़ना चाहते हैं.

 तो आज मैं आपको एक उपहार देने की तइयारी करता हूं. किसी भी पोस्ट पर कोई भी अच्छी समालोचनात्मक टिप्पणी देने वाले को एक ऐसी रणनीति बताऊँगा जिसका उपयोग आप किसी भी तरह के ट्रेड में कर सकते हैं.

समालोचना और आलोचना के बीच का महीन अन्तर तो आपको पता ही होगा. तो चलिए एक अच्छी सी टिप्पणी लिखिये. उसमें आपका ईमेल होना जरुरी है. आपके ईमेल पर ही वह रणनीति भेज दूंगा. आपके ईमेल का कोई भी दूसरा उपयोग नहीं किया जायेगा. आप चाहें तो एक ऐसा ईमेल बना लीजिये जिसपर आप कोई जरुरी काम नही करते हों. उसे सिर्फ इसी तरह के काम में उपयोग किया करिए.

आज बस इतना ही! 

Friday, August 1, 2025

ट्रेडिंग पर एक चरचा

ट्रेडिंग पर एक चरचा 


 

आज बाजार, वणिकों के लिए बाजार का अर्थ होता है प्रतिभूति बाजार (शेयर मार्केट), बन्द है तो सोचा क्यों न आज कुछ चरचा कर लूं. पर चर्चा शुरु करने से पहले ही मैं बता देना चाहता हूं, सावधान कर देना चाहता हूं कि मैं न तो सलाहकार हूं, न विश्लेषक. मैं एक साधारण वणिक हूं जो भयंकर नुकसान उठा कर भी बाजार में बना हुआ हूं. और मैं मानता हूं कि मैंने चार्टों का अध्ययन पूरी तन्मयता से किया है. अब मैं उसमें प्रवीण हो पाया हूं या नहीं यह नहीं बता सकता. क्योंकि प्रवीण हो गया रहता तो आज बड़े लाभ की स्थिति में रहता. इसे बस ऐसे समझ लीजिए कि मैं एक बढ़िया कोच हो सकता हूं पर खिलाड़ी बहुत घटिया हूं. मैं अच्छी तरह जानता हूं कि कहां टिकना मेरे आर्थिक स्वास्थ्य के लिए बुरा हूं पर तब भी टिका रह जाता हूं.यह चार्ट, इंडिकेटर, या स्ट्रेटेजी की विफलता नहीं है. यह मेरी व्यक्तिगत विफलता है. तब सवाल उठता है कि मैं यह दुस्साहस कैसे कर लेता हूं कि बाजार के बारे में चरचा कर लूं!

वास्तविकता यही है कि हजारों नहीं लाखों वणिक ऐसे हैं जो निवेश सलाहकार की सेवा नहीं ले सकते. अच्छे विश्लेषक तक पहुँचना उनके लिये सहज नहीं है. वे तो बस मित्रों से, टीवी चैनलों से, समाचार पत्रों से, यूट्यूब चैनलों से, टेलीग्राम चैनलों से, व्यावसायिक सलाह विक्रेताओं से जो सुनते हैं उसी आधार पर शेयर खरीदते बेचते रहते हैं. उनकी विवशता महाभारत के अभिमन्यु जैसी है. जो चक्रव्यूह में प्रवेश करना तो जानता है पर उससे निकलने के तरीके से अनभिज्ञ है. वह जो भी सफलता अर्जित करता है अपने पराक्रम के बल पर या अनायास बनने वाले संयोगों के बल पर. पर चक्रव्यूह के महारथी उसे अन्ततोगत्वा मार ही डालते हैं. 

मैंने चार्टों का अध्ययन करते समय देखा है कि अलग अलग समयावधि के चार्ट अलग अलग संकेत देते हैं. इस स्थिति में किस संकेत का पालन किया जाय मैं आज बस इसी विषय पर केन्द्रित रहना चाहता हूं इस लेख में.

सबसे पहले तो आपको यह स्पष्ट निर्धारित कर लेना होगा कि आप निवेशक हैं या वणिक हैं. अगर निवेशक हैं तो चार्ट देखना छोड़ दीजिये, बाजार में प्रतिदिन होने वाले उतार चढ़ाव को अनदेखा कर दीजिए. क्योंकि आप कहीं और से अपनी आय प्राप्त कर रहे हैं और उस आय का एक हिस्सा आप शेयर बाजार में लगा रहे होते हैं. आप अपनी आय के मूल स्रोत पर ध्यान केन्द्रित रखिए.

मगर यदि आप वणिक हैं, जो आपमें से अधिकतर लोग हैं, तो आपको अब यह तय करना है कि आप किस तरह के वणिक, ट्रेडर, हैं. वाणिकी कई तरह की होती है. कुछ लोग स्काल्पिंग करते हैं, कुछ डे ट्रेडिंग, कुछ स्विंग ट्रेडिंग, कुछ पोजीशनल ट्रेडिंग करते हैं. दुख की बात यह होती है कि आप विशुद्ध वाणिकी में टिकते नहीं है. आपकी स्थिति उस सन्यासी की तरह होती है जिसके बारे में कहा गया है कि - 
नारी मुई घर संपति नासी
माथ मुड़ाय भए सन्यासी !

आप करते तो हैं वाणिकी पर जब आप बड़े नुकसान की स्थिति में आ जाते हैं तब आप निवेशक बन जाते हैं. गलती की पहली शुरुआत यहीं से होती है. कुछ लोग इसके बाद एवरेजिंग की कुचेष्टा करते हैं. यानी गिर रहे शेयर को नीचे के मूल्य पर खरीद कर अपने शेयर का औसत मूल्य सुधारने की कोशिश करते हैं. एवरेजिंग गलत नहीं होता, आप उसका इस्तेमाल गलत तरीके से करते हैं. आप गिरते शेयर में एवरेजिंग करते हैं जबकि आपको एवरेजिंग तब करना चाहिये जब उस शेयर में सुधार के लक्षण दिखने लगें, जब वह अपने पिछले उच्च स्तर के ऊपर निकले. कुछ जानकार कहते हैँ कि अपनी पूरी पूंजी या जो भी पूंजी आप किसी शेयर में लगाना चाहते हैं तो आपको कभी भी पूरी पूंजी एक साथ नहीं लगाना चाहिए.उसे दो या तीन टुकड़ों में लगाइए जब वह आपकी सोच की दिशा में चलायमान हो. 

हम कुछ आगे बढ़ आए. जब आप यह तय कर लेते हैं कि आप किस तरह के वणिक बनना चाहते हैं तो आपके सारे निर्णय उसी तरह के होने चाहिए. स्काल्पिंग में पूंजी अधिक लगाई जाती है पर बहुत ही छोटी अवधि के लिए. स्काल्पिंग की तुलना उस चेन स्नैचर से की जा सकती है जो भरे बाजार में मौका देख  किसी का चेन, किसी का पर्स उड़ा लेता है और पलक झपकते पलायन कर जाता है. उसे मालूम होता है कि अगर पकड़ा गया तो बाजार की भीड़ उसे जिन्दा रहने नहीं देगी. इन्ट्राडे ट्रेडर थोड़े आराम से रह सकता है पर उसे भी इस खेल कि कबड्डी की तरह खेलना चाहिए, एकदिना क्रिकेट की तरह. अगर वह इसे टेस्ट मैच की तरह खेलेगा तो हानि की संभावना बढ़ जाती है. 

अब आइए स्विंग ट्रेडिंग और पोजीशनल ट्रेडिंग की तरफ. स्विंग ट्रेडर झूला तो झुलता है पर कोशिश करता है कि वहां उतर जाय जब झूला ऊँचाई छू ले. पर आप जानते हैं कि यह आसान नहीं होता. डर होता है कि कहीं गिर न पड़ूं, चोट न लग जाए. वाणिकी में भी कुछ कुछ ऐसा ही होता है. आपको लगता है कि कहीं यही निकल गया और बाजार और ऊपर चलता गया तो मेरा तो नुकसान हो जाएगा. होना यह चाहिए कि जब आप कोई सौदा करने जाँय तो सबसे पहले यह तय कर लें कि कितना नुकसान उठा सकता हूं. अपनी नुकसान की सीमा में रहते हुए ही आपको खरीददारी करनी होती है. अब आपके सामने दो रास्ते होते हैं. एक कहता है कि तय कर लीजिए कि कितना मुनाफा होने पर मैँ इस सौदे के निपटा दूंगा. दूसरा कहता है कि जैसे जैसे बाजार उठता जाए वैसे वैसे आप अपने नुकसान की सीमा को बदलते जांय. पर जब एक बार आपका सौदा लाभ की स्थिति में आ जाता है तब उसके बाद आपको कभी भी नुकसान की स्थिति मेंं टिकना नहीं चाहिए. तुरत निकल जाइए उस सौदे से. 

और ऐसे वणिकों को अपनी टिकने की अवधि के अनुरुप कैंडल चार्ट की समयावधि तय करनी चाहिए. स्काल्पर को एक मिनट से तीन मिनट तक के चार्ट को देखना चाहिए. डे ट्रेडर पांच मिनट से पन्द्रह मिनट की समयावधि का चार्ट देखा करे. स्विंग और पोजिशनल ट्रेडर अपनी टिकने की ताकत के हिसाब से 75 मिनट, 125 मिनट, या एक दिन का चार्ट देखे. जैसे जैसे यह अवधि बड़ी होती जाएगी वैसे वैसे आपको कम पूंजी लगानी चाहिए और जैसे जैसे यह अवधि छोटी होती जाएगी वैसे वैसे आपको सौदे में अधिक पूंजी लगाने की जरुरत पड़ेगी. 

इसको इस तरह से समझिए कि एक मिनट वाला चार्ट का विचरण छोटे दायरे में होता है और एक दिन वाला चार्ट बड़े दायरे में विचरण करता है. इसलिए जब भी आप किसी की सलाह मांगिए या मानिए तो उसे स्पष्ट बता दीजिए कि आपकी निवेश अवधि कितने की है, या आप कितना प्रतिशत लाभ कमाना चाहते हैं एक सौदे में. कितने से ज्यादा उपयोगी प्रतिशत में होता है. 

मान लीजिए कि आप किसी बैँक में दीर्घावधि जमा खाता (फिक्स्ड डिपाजिट) खोलते हैं तो आपको कितना प्रतिशत वार्षिक ब्याज मिलता है. वणिक को अपने लाभ की सीमा इसी ब्याज दर के अनुसार करनी चाहिए. शेयर मार्केट का सौदा जोखिम भरा होता है और लाभ की अपेक्षा हानि की संभावना अधिक होती है. इसलिए अगर आपको वह वार्षिक ब्याज एक सप्ताह में मिल जाय तो क्या बुरा है. आपकी पूंजी आपको सुरक्षित मिल जाती है. और चूंकि बाजार में हजारों प्रतिभूतियां हैँ तो आप फिर किसी दूसरी प्रतिभूति में प्रवेश कर सकते हैं, या आप एक ही प्रतिभूति में ऊपर बेच कर नीचे खरीदते रह सकते हैं. बस ध्यान में रहे कि जब खरीदें तब उससे नुकसान को अपनी पूर्व निर्धारित सीमा में रखें. 
 

आशा है कि आजकी चरचा आपको पसन्द आई होगी. अगर आपके पास कोई प्रश्न हों तो आप उसे मेरे इस वेबसाइट पर दिए गए कमेंट बाक्स में डाल दीजिए. कोशिश करूंगा कि उसका उत्तर जल्द से जल्द दे सकूं. 

मैंने पहले भी यह बता रखा है कि मैं किसी शेयर विशेष का नाम लेकर सलाह नहीं देता पर आपके प्रश्न के अनुरुप आवश्यक हुआ तो अपने विचार जरुर बता दूंगा. उस विचार पर चलने से पहले सुविचार जरूर कर लीजिए.

Saturday, June 14, 2025

दस मिनट में बीटीएसटी ट्रेडिंग

 बहुत लोगों की यह शिकायत होती है कि वे ट्रेड करना तो चाहते हैं पर बाजार की समझ नहीं है. न तो फंडामेन्टल विश्लेषण कर सकते हैं ना चार्ट पढ़ने आता है. 

ऐसे ही लोगों के लिये हमने एक आकर्षक रणनीति बनाने की कोशिश की है. इसके लिये आपको दिन भर में सिर्फ दस से पन्द्रह मिनट लगाने होंगे.

आपके पास अगर डीमैट खाता है और उसमें आप आप्शन की ट्रेडिंग कर सकते हैं तो आप इस रणनीति को आजमा सकते हैं. आखिरी परिणाम इस काल्पनिक ट्रेड से अलग हो सकता है.

आपको सिर्फ निफ्टी बैंक की ट्रेडिंग करनी होगी. यह रणनीति आप्शन खरीदने वालों के लिये है और इसे एक लाख रुपये की पूंजी से किया जा सकता है.

आपको अगले महीने खतम होने वाले आप्शन खरीदना है. मौजूदा महीने वाले में नहीं. अगले महीने का आप्शन खरीदने में पूंजी अधिक लगती है पर थिटा लॉस कम होता है. इस काल्पनिक ट्रेड में मई महीने में जून सीरीज के आप्शन ट्रेड किये जाने की कल्पना की गई है. 

इस रणनीति में रोज शाम को 3-25 पर आपको कॉल और पुट आप्शन दोनों एक ही बास्केट आर्डर से खरीदना होगा और अगले दिन बाजार खुलते ही दोनों को एक साथ ही बेचना होगा. यह पूरी तरह से एक मशीनी रणनीति है जिसमें आपके विचारों का, आपके डर या लालच का कोई समावेश नहीं है. अगले दिन बाजार ऊपर खुले या नीचे या सपाट खुले आपको कोई अन्तर नहीं पड़ना चाहिये. एक मशीन की तरह ट्रेड कर के देखिये.

इस आकलन में जून महीने का बैंकनिफ्टी का आप्शन मई के महीने में ट्रेड किया गया माना गया है. ये ट्रेड मैंने लिये नहीं थे. एक विचार आया सो इसका गुणा भाग कर बैठा. इसमें किसी भी तरह के पूर्वाग्रह से बचा गया है और माना गया है कि दिन के बन्द भाव पर खरीदा गया आप्शन अगले दिन के खुलने वाले भाव पर बेच दिया गया हो. दोनो तरह के ट्रेड मार्केट आर्डर माने गये हैं. 

इस काल्पनिक ट्रेड के लिये अधिकतम पूंजी करीब 1 लाख चाहिये थी. महीने भर के ट्रेड के बाद जो परिणाम आया वह था 19390 रुपये. इसमे से ब्रोकरेज वगैरह निकाल दीजिये तो करीब 19000 का लाभ हुआ रहता अगर किसी ने इसे इस तरह ट्रेड किया होता.

गुणाभाग वाले स्प्रेडशीट का एक चित्र नीचे दिया जा रहा है.  



Monday, May 19, 2025

ट्रेडिंग करते समय प्रेग्नेन्ट लेडी का सम्मान करें

 ट्रेडिंग करते समय प्रेग्नेन्ट लेडी का सम्मान करें

लेडीज तो हमेशा सम्मान का पात्र होती हैं और जब कोई शुभ कार्य कर रहें हों तो उस समय उनपर विशेष ध्यान देना चाहिये. आज मैं आपसे ट्रेडिंग करते समय प्रेग्नेन्ट लेडी की उपयोगिता पर चर्चा करने जा रहा हूं.

इसके पहले कि मैं आगे बढ़ूं यह बात पुन: रेखाकित कर देना आवश्यक है कि मैं न तो कोई निवेश सलाहकार हूं न शोधकर्ता. मैँ एक सामान्य ट्रेडर - वणिक - हूं जो अपने अनुभवों की चरचा करना पसन्द करता है. हमेशा की तरह आज भी मैं किसी शेयर विशेष की बात नहीं करने वाला. शेयर कौन सा होगा यह आप को तय करना होगा, किस तरह का ट्रेड करना है यह आपको तय करना है और चार्ट में कौन सा टाइम फ्रेम इस्तेमाल करना है यह भी आपही तय करेंगे. बार बार यह भी बता चुका हूं कि आज तक कोई भी संकेतक - इंडिकेटर - या रणनीति - स्ट्रेटेजी - नहीं बनी जो हमेशा सही साबित हो. अगले कँन्डल में कुछ भी हो सकता है. बाजार उपर जा सकता है, नीचे जा सकता है, या यूंही चक्कर मारते रह सकता है. इस लिये कोई भी सौदा खुद जाँच परख कर के ही करें या अपने निवेश सलाहकार से बात कर के. अब चलिये बात करते हैँ प्रेग्नेनंट लेडी की.

असल में ट्रेडिंग मे इसको हरामी कहते हैं और हिन्दी में या हमारी स्थानीय भाषाओं में हरामी एक घृणित शब्द है. हरामी शब्द जापानी भाषा से आया है जिसका अर्थ होता है गर्भवती महिला यानि कि प्रेग्नेंट लेडी.

अब चूंकि मैं सामान्य ट्रेडरों के हिसाब से चर्चा करता हूं और सामान्य वणिक सिर्फ लिवाल हो सकता है बिकवाल नहीं. इसलिये मैं सिर्फ लिवाल वाली प्रेग्नेंट लेडी की बात करुंगा. सवाल उठता है कि इसको पहचाने कैसे ? इसका महत्व स्थानविशेष से प्रभावित होता है या नहीं ? कितने लाभ की संभावना है ? कितना जोखिम है ? वगैरह वगैरह.

इस रणनीति का व्यवहार करने में एक शर्त यह है कि जिस टाइम चार्ट पर यह बने उसी टाइम फ्रेम पर आप ट्रेड कर रहे हों. सामान्यतया इसे लंबी अवधि के टाइम फ्रेम पर ट्रेड करना ज्यादा सही रहेगा. लंबी अवधि के टाइम फ्रेम पर आपको अपेक्षाकृत कम राशि लगानी पड़ती है. टाइम फ्रेम जितना छोटा होगा राशि उतनी ही बड़ी लगानी पड़ेगी.

यह प्रेग्नेंट लेडी आपके चार्ट पर कभी भी दीख सकती है. आपको देखना है कि यह  उपर जाने वाला है या नीचे. स्वाभाविक है कि मैं सिर्फ लिवाल वाले ट्रेड की ही चर्चा करुंगा सो एक लंबी बियरिस कैंडल के बाद जब एक छोटी सी बुलिस कैंडल बने तो आपको इस लेडी के दर्शन मिल गये हैं. अब आपको अगली कैन्डल या कुछ कैन्डल का इंतजार करना पड़ेगा जब तक कि मूल्य रेखा बड़ी कैन्डल से उपर निकले. आप अब इस ट्रेड को ले सकते हैं, यानि कि लांग हो सकते हैं. जोखिम के लिये आपको छोटी कैन्डल के निचले बिन्दु को ध्यान में रखना पड़ेगा. और जोखिम के बराबर, डेढ़ा, या दुगुना पर आपको लाभ लेकर निकल जाना है. ज्यादा के लालच में पड़े तो - लटकले त गइले बेटा - वाली हालत बन सकती है. और जोखिम रेखा - स्टॉप लॉस - के साथ कोई भी छेड़छाड़ खतरनाक साबित हो सकती है. याद रखिये जिस दिन आप जोखिम रेखा को पौराणिक लक्ष्मण रेखा मानना शुरु कर देंगे उसी दिन से आपकी ट्रेडिंग लाभ देने लग जायेगी. ट्रेड नुकसान तब भी दे सकता है पर ट्रेडिंग लाभ दायक ही होगी. एक सौदा ट्रेड कहा जाता है और कई ट्रेड से ट्रेडिंग बनती है.

नीचे दिये गये चित्र में हमने दो आयत बनाये हैं. पहली आयत लंबी है वह सौदा लेने लायक नहीं बना क्योंकि बड़ी रेखा से उपर नहीं निकला और इस बीच कुछ निगेटिव कैन्डल बन गये. पर दूसरे आयत के बाद आप देखेंगे कि अच्छा लाभ मिल सकता था. सकता था को हमेशा याद रखियें. सकता था पर सकेगा ही तय नहीं होता. 




लंबी लाल कैन्डल के बाद बनी पॉजिटिव छोटी कैन्डल का कोई भी सिरा लंबी वाली कैंडिल के ऊपर या नीचे नहीं निकलनी चाहिये. तभी यह प्रेग्नेंट लेडी कही जायेगी.
ट्रेड करने से पहले टाइम फ्रेम तय कर लीजिये. जिस टाइम फ्रेम पर यह लेडी नजर आई है उसी टाइमफ्रेम पर आपको ट्रेड करना है.
जोखिम रेखा का पालन करिये. मृग मरीचिका में उस रेखा के परे जाना आपको जोखिम में डाल सकता है.
एक कहावत और याद रखिये - समय से पहले और भाग्य से ज्यादा न तो मिला है न मिलेगा. आपको पता नही कि आपका समय कब आयेगा और आपके भाग्य में कितना लिखा है. इसलिये हमेशा सही दिशा में चलते रहने का, प्रयास करते रहने की आदत डाल लीजिये.

लाभ मिले तो एक बार धन्यवाद दे दीजियेगा पर नुकसान होने पर हमें गाली मत दीजियेगा. मुझे क्या मालूम आपका समय कब आयेगा या आपके भाग्य में कितना है.

शुभ लाभ !





Sunday, April 27, 2025

पाकिस्तान की हालत शेयर बाजार के ट्रेडरों जैसी

 पाकिस्तान की हालत शेयर बाजार के ट्रेडरों जैसी


पाकिस्तानी मुस्लिम आतंकियों ने हाल ही में पहलगाम में जिस घृणित वारदात को अंजाम दिया है उसका परिणाम तो उसे भुगतना ही पड़ेगा. चुन चुन कर हिन्दुओं को मारने के फेर में उसने कश्मीर के मुसलमानों के पेट पर लात मार दी है. पर्यटकों के भरोसे उनकी रोजी रोटी चलती है और पाकिस्तान ने उसी रोजगार का कबाड़ा कर दिया. अब पाकिस्तानी इस चिन्ता मे मरे जा रहे हैं कि हिन्दुस्तान का हमला कहां होगा ? जमीनी युद्ध या आसमानी हमला या समन्दर की तरफ से ?

उनकी चिन्ता से मैं दुबला नहीं हो रहा. मैं तो आज एक खबर पढ़ सुन कर सोचने लग गया कि क्या पाकिस्तान की हालत ठीक वैसी ही नहीं हो गयी है जैसी शेयर बाजार में रिटेल ट्रेडरों की आये दिन होती रहती है. सारे चैनल सारे फिनइन्फ्लूएन्सर जब चिल्ला रहे होते हैं कि बाजार धड़ाम होने जा रहा है तो रिटेल ट्रेडर डर के मारे अपने शेयर बेच देता है, आप्शन के बाजार में पुट खरीद लेता है. पर जब बाजार खुलता है तो वह चकरा जाता है. क्योंकि बाजार एक नई ऊँचाई छू रहा होता है. या फिर जब चैनलों से सलाह दी जाती है कि आज बाजार उछाल मारेगा तो उस दिन रिटेलर आसमान छूते दामों पर भी शेयर खरीद लेता है या कॉल आप्शन लेकर बैठ जाता है. अब इस दिन बाजार धड़ाम हो जाता है.

पाकिस्तान की हालत इन्हीं रिटेल ट्रेडरों जैसी हो गयी है. चारों तरफ से शोर सुनने को मिल रहा था कि भारत पानी के लिये तरसा मारेगा पाकिस्तानियों को. इस डर में पाकिस्तानी अपने न्यूकपीर की धमकी देने लगा कि अगर पानी रोका तो खून की नदियां बहा देंगे, हिन्दुस्तान को नेस्तनाबूद कर देगा. पर हाय खुदा यह क्या किया इस मोदी ने ! पाकिस्तानी सूखे से डर रहे थे और झेलम की बाढ़ झेलना पड़ रहा है. और जब तक इस बाढ़ से निपटेगें तब तक शायद हिन्दुस्तान अपने डैम बन्द कर चुका रहेगा पाकिस्तानियों को पानी के लिये तरसाने के लिये.

अब इस बात से पाकिस्तान को बुद्धि आये या नहीं शेयर बाजार के रिटेल ट्रेडर वणिकों को जरूर सीख लेना चाहिये कि शेयर बाजार रोज युद्ध ही कर रहा होता है. चैनल क्या बताते हैं, फिनइन्फ्लुएन्सर क्या बताते हैं उसका कोई मतलब नहीं होता. मतलब तो आपरेटर ही जानते हैं कि वे आज बिकवाली करेगें या लिवाली. वे जो भी करें करेंगे वणिकों के सोच के ठीक उल्टा ही.

वणिकों को अपने को हर हालात के लिये तैयार रखना चाहिये. पहले से कुछ भी तय कर के मत रखिये. बाजार में भाव ही सब कुछ है. इस अन्तर्यामी को समझने की आपकी हर चेष्टा बेकार जायेगी अगर आपने अपने आप को नहीं समझा है. कोई भी संकेतक (इंडिकेटर), कोई भी रणनीति शाश्वत नहीं होती. किसी भी पल किसी भी तरफ चल देता है बाजार. आपको हमेशा चौकन्ना रहना पड़ता है. शेयर बाजार की हार जीत आप पर, आपकी सोच पर, आपके काम करने के तरीके पर निर्भर करती है. चौकन्ना रहिये पर जल्दबाजी मत करिये. पहले बाजार की दिशा समझिये और उसी तरफ चलिये जिधर बाजार जा रहा हो. और बाजार बैंक नहीं है जो आपको कुछ न कुछ ब्याज दे ही देता है. बाजार आपकी पूंजी को भी झेलम के प्रवाह में बहा सकता है. सो पाकिस्तानियों की तरह नहीं रह कर अपनी औकात में रहिये, अपने बेंवत भर ही भौकाल बांधिये. क्योकि होगा वही जो मोदी चाहेगा ! मोदी है तो मुमकिन है !

बाजार को तो पता ही नहीं रहता कि कोई वणिक भी अपने लैपटॉप पर, अपने मोबाइल पर वणिकई कर रहा है. आपके खरीदने बेचने से उसकी परिस्थिति में कोई बदलाव नहीं होता. हाथी चले बाजार, कुत्ते भूंके हजार ! आपने अगर मुनाफे की लालच में बड़ा नुकसान उठा ही लिया है तो एक बार नुकसान उठाने की कोशिश कर के भी देख लीजिये. जिस दिन आप नुकसान उठाने की कला सीख लेंगे. उसमें पारंगत हो जायेंगे उसी दिन से आप मुनाफे की दिशा में चल पड़ेंगे. हमेशा याद रखिये कि मुकाबला हिन्दुस्तान से है. उससे दोस्त बन कर रहना सीख लीजिये. मुनाफे में रहियेगा.

Saturday, April 5, 2025

इक्विटी बनाम आप्शन

 इक्विटी बनाम आप्शन


मैं यह बात पहले भी कई बार कह चुका हूं कि मैं कोई निवेश सलाहकार या रिसर्च एनालिस्ट नहीं हूं, सेबी से प्रमाणित या अधिकृत होना तो दूर की बात है. मैं जो कुछ भी बताना चाहता हूं वह अपने अनुभव के आधार पर. पिछले सतरह सालों से मैं एक वणिक की तरह काम करता आया हूं. शुरुआती सालों में मैंने वे सारी गलतियां की हैं जिन्हें करना नहीं चाहिये था. लोगों के टिप्स पर कोई शेयर खरीदना-बेचना. लगे कि जब शेयर का दाम तेजी से बढ़ रहा है तब खरीद लेना और फिर अपनी गलती पर पश्चाताप करते रहना. और जब शेयर में नयी तेजी आए तब जान बचा कर निकल जाना. मेरे जमाने में तब यस बैंक का घोटाला सामने आया था और आज तक मैंने जितना नुकसान कुल मिला कर उठाया है उसका लगभग दो तिहाई अकेले यस बैंक का योगदान है.

इतना बता देने के बाद अब मैं उस विषय पर आ रहा हूं जो एक वणिक के नजरिये से मैंने देखा है. अक्सर लोग कहते हैं कि फ्यूचर आप्शन की ट्रेडिंग जोखिम भरी होती है और अधिकतर वणिक नुकसान में ही रहते हैं. पर क्या आप कोई ऐसा बिजनेस बता सकते हैं जिसमें हर कोई मुनाफे में रहता है ? क्या कोई ऐसा व्यवसाय या अध्यवसाय बता सकते हैं जिसमें अधिकतर लोग सफल होते हैं ? अकाट्य सत्य यही है कि सफलता सिर्फ चन्द लोगों को मिल पाती है पर इसका निष्कर्ष यह कदापि नहीं हो सकता कि लोग प्रयास करना ही बन्द कर दें. समय से पहले और किस्मत से ज्यादा न तो किसी को मिला है, न मिल सकता है. पर याद रखना जरुरी है कि हमारा या आपका समय कब आयेगा यह किसी को ज्ञात नहीं होता. हमारी आपकी किस्मत में कितना लिखा है यह भी अज्ञात ही होता है. हमारा काम सिर्फ और सिर्फ प्रयास और सही दिशा में प्रयास करना होना चाहिए. परिणाम जो आए उसे स्वीकार करना हमारी नियति होनी चाहिये.

इस वेबसाइट पर निवेश की सलाह नहीं दी जाती, वह इस कारण कि मैं निवेश करता ही नहीं. मैं तो  एक वणिक हूं और मुझे आज और अभी से मतलब रहता है. कल किसने देखा है ! पर एक सावधानी मैं हमेशा रखता हूं कि मैं कभी किसी शेयर विशेष या आप्शन विशेष को खरीदने या बेचने की सलाह नहीं देता. जो लोग भी ऐसी सलाह देते हैं उनकी सलाह के पीछे उनका स्वार्थ छिपा रहता है. यहां तक की आप जिस ब्रोकर से अपना सौदा कराते हैँ उसकी सलाह को भी सावधानी से ही मानें. किसी भी टीवी चैनल, किसी भी यू ट्यूब चैनल या किसी भी वेबसाइट की बात नहीं मानें अगर वह किसी सौदा विशेष की बात करता हो. सुनिये सबकी पर करिये अपने मन की. हां अगर आप निवेशक हैं तो यहां अपना समय बेकार मत करें. यहां निवेश की कोई बात की ही नहीं जाती. निवेश शादी की तरह होता है जन्म जन्मान्तर के लिये. जबकि वणिकई वन नाइट स्टैंट जैसी होती है. मजा आया तो ठीक वरना कल फिर कुछ दूसरा देखेंगे. बाजार रोज खुलता है, छुट्टियों के दिन को छोड़कर. छुट्टियों के दिन अपने हाल के सौदों पर नजर डाला करिये जिससे आप जान सकें कि क्या फायदेमन्द रहा और क्यों, क्या नुकसानदेह रहा और क्यों.

वणिक कर्म में जितना जोखिम ले सकते हैं उसी के अनुपात में आपका लाभ या हानि रहने वाली है. कम जोखिम में नुकसान कम होगा तो मुनाफा भी कम ही रहेगा. ज्यादा जोखिम में अगर फायदा ज्यादा हो सकता है और तो नुकसान भी उतना ही बड़ा हो सकता है. इसलिये वणिक कर्म करते हुये आप अपने संभावित फायदे की न सोच कर इस पर ध्यान केन्द्रित करें कि आज आप कितना नुकसान बरदाश्त कर सकते हैं. नुकसान बस उतना ही सहना चाहिये जिससे आप कल दुबारा बाजार में सौदे कर पाने की सामर्थ्य बनाये रखें. याद रखिये वणिक कर्म में आपके नियन्त्रण में सिर्फ आपका नुकसान है, मुनाफा कितना होगा यह बाजार तय करता है.

कोई भी रणनीति, कोई भी संकेतक आपको सफलता की गारंटी नहीं देता. बन्द घड़ियां भी दिन में दो बार सही समय बता ही देती हैं. आपका अपने स्वभाव, अपनी परिस्थिति के अनुसार रणनीति सोचनी चाहिये. दूसरे उन लोगों से हमेशा सचेत रहें जो किसी सौदे विशेष की सलाह देते हों. हां अगर आप निवेशक हैं तो अपना निवेश सलाहकार किसी अनुभवी आदमी को बना लें.

सफल वणिक कर्म के लिये जरुरी है कि आप अपनी लाभ की सीमा भी तय कर करे रखें. छोटा -छोटा मुनाफा, छोटा-छोटा नुकसान नुकसान लंबी अवधि में हमेशा फायदेमंद साबित होगा. एक साधारण मापदण्ड यह होना चाहिये कि आप अपना संभावित लाभ अपनी बरदाश्त करने योग्य नुकसान के बराबर या हद से हद तीन गुना रखें. अगर आपकी रणनीति आपको 60 प्रतिशत सफलता देती है तो सौ सौदों में चालीस बार आपका नुकसान कुल मिला कर चालीस हो औ साठ बार में कुल मिला कर एकसौ बीस हो तो इस गणना में आपको हर सौदे पर 0.8 का मुनाफा होता है जो कि पर्याप्त होना चाहिये.

सफल वणिक कर्म के लिये यह बहुत ही जरुरी है कि आपके सौदे का आकार आपकी नुकसान उठाने की सीमा से प्रतिबन्धित रहे. मान लीजिये कि आप किसी भी सौदे में अधिकतम एक हजार रुपये के नुकसान बरदाश्त कर सकते हैं तो आपको अपने सौदे का आकार (1000/संभावित नुकसान के बराबर होना चाहिये. उदाहरण के लिये आप जो सौदा करने जा रहे हैं उसमें प्रति नग एक रुपये का नुकसान की सीमा नजर आती हो तो आपको हजार नग से ज्यादा का सौदा नहीं करना चाहिये.

वणिक कर्म में दो तरह की टीमें शामिल होती हैं. एक टीम खरीदने वालों की होती है तो दूसरी टीमे बेचने वालों की. हर टीम में एक से बढ़कर एक धुरंधर और बड़े खिलाड़ी मिल जायेंगे. हमारी गलती हो जाती है कि हमें अपनी अक्ल हमेशा दूसरे से ज्यादा लगती है. खरीदने वाला कम जोखिम लेता है क्योंकि उसे मालूम है कि जो भी उसने खरीदा है वह हद से हद शून्य तक गिर सकता है. पर जो बेचने वाला होता है उसका जोखिम असीम होता है क्योंकि मूल्य किसी भी स्तर तक जा सकता है. उपर की कोई सीमा नहीं होती. हम में से अधिकतर लोग खरीदने वाली टीम में होते हैं. हम भूल जाते हैं कि बेचने वाला हमेशा ज्यादा जानकार या ताकतवर हो सकता है. अगर आपके पास खरीदने का कारण है तो उसके पास भी बेचने के कारण होंगे ही. याद रखिये कि वणिक कर्म में जीरो सम गेम का खेल होता है. अगर कोई जीत रहा है तो सामने में कोई उससे ज्यादा हार रहा है. बीच में दलाली और सरकारी टैक्स दोनों से मलाई काट रहे होते हैं.

लेख लंबा होता जा रहा है और अब तक मैने उसकी चर्चा की ही नहीं कि इक्विटी बनाम आप्शन में क्या श्रेयस्कर होता है ? जोखिम आप्शन में ज्यादा होता है क्योंकि उसमें मुनाफे की संभावना भी ज्यादा होती है और जब नुकसान होता है तो नुकसान भी उसी अनुपात में ज्यादा होता है. इक्विटी में जोखिम कम होता है क्योंकि आप उसे खरीद कर पकड़े रह सकते हैं. और देर सबेर उसके लाभ में जाने की संभावना हमेशा बनी रहती है. आप्शन में एक खास समय तक उसका मूल्य शून्य हो ही जाना है.

इक्विटी में आपको बड़ी राशि लगानी पड़ती है जबकि आप्शन में एक छोटी राशि. गलती यहां हो जाती है कि हम आप्शन में होने वाले लाभ को तो देख लेते हैं पर भूल जाते हैं कि नुकसान भी उसी गुणन में होने की आशंका होती है. इक्विटी वणिक कर्म धीमी रफ्तार से चलता है जबकि आप्शन में बहुत ही तेज रफ्तार से. पलक झपकते आप्शन का लाभ नुकसान में बदल सकता है जबकि इक्विटी में थोड़ा समय मिल सकता है. आप्शन का खेल कबड्डी जैसा होता है. आपको अकेले प्रतिद्वन्द्वी के किले में घुसने होता है जहां एक पूरी टीम आपको घेरने का इंतजार कर रहती है. आपको अपनी साँस टूटने से पहले प्रतिद्वन्द्वी के किले से वापस लौट आना होता है.

पर एक मिथक यह भी है कि आप्शन का खेल एक दिन का होता है. साप्ताहिक आप्शनों से दूर रह कर  अगर आप मासिक आप्शन में वणिकी कर रहे हैं तो आप कुछ दिन का इंतजार कर सकते हैं. पर तब आपको उतने ही लाभ के लिये अधिक ऊंचाई तक जाना पड़ सकता है. मेरा सुझाव यही रहेगा कि जो भी आप्शन आप खरीदें - कॉल का या पुट का - उससे जितनी जल्दी निकल जायें उतना ही अच्छा. छोटी सामर्थ्य वाले वणिक को एक सौदे में पांच सात सौ से ज्यादा के लाभ की आशा नहीं रखनी चाहिये. छोटा छोटा मुनाफा अगर कई बार हो तो वह बड़ा मुनाफा दे सकता है. पर अगर कहीं बड़े लाभ की प्रतीक्षा में बड़ा नुकसान हो गया तो आप बरबाद भी हो सकते हैं. इसलिये आप्शन में हमेशा छोटा लाभ लेकर निकल जाने की आदत डाल लें. आपको शायद पता नहीं हो पर बड़े खिलाड़ी बहुत ही कम प्रतिशत का लाभ लेकर निकल जाते हैं. वह इसलिये कि उनकी राशि बहुत ही बड़ी होती है. एक करोड़ की राशि का सौदा करने वाला अगर एक फीसदी लेकर निकल जाया करे तो उसको हर सौदे में एक लाख का मुनाफा होता है. पर अगर जो आप दस पन्द्रह हजार रुपये से आप्शन के मैदान में हैं तो एक फीसदी का मुनाफा तो ब्रोकरेज वगैरह में ही निकल जायेगा. पर पांच प्रतिशत का मुनाफा लेकर सौदा काट देना लंबी अवधि में लाभदायक साबित हो सकता है. मगर तब आप को दस प्रतिशत से अधिक का नुकसान होते ही निकल भागना पड़ेगा. नुकसान में मैं दस प्रतिशत की बात इस कारण कर रहा हूं कि उतार चढ़ाव इतनी तेजी से होता है कि आप को फैसला लेने में देरी हो सकती है. जब आप कोई आप्शन खरीदते हैं तो उस समय आप अपनी रणनीति के हिसाब से खरीद रहे होते हैं. इसलिये पांच प्रतिशत का मुनाफा जल्द ही मिल जायेगा. हाँ कई बार में एकाध बार आपको दस प्रतिशत का नुकसान भी उठाना पड़ेगा. पर कुल मिलाकर आप लाभ में रहेंगे, ऐसी आशा की जा सकती है.

आखिरी बात यह कि इस वणिक कर्म के लिये आप रेंज बार का उपयोग करें. यह रेंको से बेहतर होता है और सामान्य कैन्डल की तरह हर मूवमेंट दिखलाता रहता है. अगर इस रेंज बार के साथ आप फेयर वैल्यू गैप को भी शामिल कर लें तो लाभ होने की संभावना बढ़ जायेगी.

अपनी बात तो मैँ काफी देर से कह रहा हूं. आप अपनी बात कब कहियेगा ? अगर आपके कुछ प्रश्न हों तो पूछ कर देखिये.

Thursday, March 20, 2025

आशा से हुलसना और आशंका से झुलसना

आशा से हुलसना और आशंका से झुलसना

बहुत पहले एक उपन्यास में पढ़ा था कि आशा से हुलसना और आशंका से झुलसना खत्म होते ही प्यार मर जाता है. मगर जबतक आशा से हुलसना और आशंका से झुलसना बन्द नहीं कर पाइयेगा तब तक आप एक सफल वणिक नहीं बन सकते. क्योंकि वणिकई - trading - में आशा और आशका का द्वन्द्व हमेशा चलता रहता है और एक सफल वणिक को इससे मुक्त होना बहुत ही जरुरी होता है.

और यहीं याद आ जाती है शिवमंगल सिंह 'सुमन' की एक कविता -

यह हार एक विराम है
जीवन महासंग्राम है
तिल-तिल मिटूँगा पर दया की भीख मैं लूँगा नहीं।
वरदान माँगूँगा नहीं।।

स्‍मृति सुखद प्रहरों के लिए
अपने खंडहरों के लिए
यह जान लो मैं विश्‍व की संपत्ति चाहूँगा नहीं।
वरदान माँगूँगा नहीं।।

क्‍या हार में क्‍या जीत में
किंचित नहीं भयभीत मैं
संधर्ष पथ पर जो मिले यह भी सही वह भी सही।
वरदान माँगूँगा नहीं।।

लघुता न अब मेरी छुओ
तुम हो महान बने रहो
अपने हृदय की वेदना मैं व्‍यर्थ त्‍यागूँगा नहीं।
वरदान माँगूँगा नहीं।।

चाहे हृदय को ताप दो
चाहे मुझे अभिशाप दो
कुछ भी करो कर्तव्‍य पथ से किंतु भागूँगा नहीं।
वरदान माँगूँगा नहीं।।

- शिवमंगल सिंह ‘सुमन’

(साभार - कविता कोश  )

अलग बात है कि एक बार भारत के पूर्व प्रधानमंत्री कवि हृदय  स्व. अटल बिहारी बाजपेयी ने इस कविता का पाठ कर के इसे इतना विस्तार दे दिया कि बहुतों को लगता है कि यह उन्हीं कि कविता है.

कवि ने इस कविता को जिस भी अभिप्राय से लिखा हो पर आज मैं इस कविता का उपयोग वणिकई के सन्दर्भ में करने जा रहा हूं.  आशा से हुलसना और आशंका से झुलसना बन्द कर देना ही पर्याप्त नहींं है.

शिवमंगल जी कि कविता की पंक्ति है -
यह हार एक विराम है
जीवन महासंग्राम है

एक वणिक को इससे यही सन्देश ग्रहण करना चाहिये कि वणिकई में मिली हार जीवन का अन्त नहीं. मुझे वणिकई आती नहीं पर -
तिल-तिल मिटूँगा पर दया की भीख मैं लूँगा नहीं।
वरदान माँगूँगा नहीं।।

मैँ यह संग्राम जीतने के लिये लड़ता रहूंगा. किसी से कोई टिप्स नहीं लूंगा. किसी दूसरे की सलाह पर मैं अपना ट्रेड कदापि नहीं लूंगा.

क्‍या हार में क्‍या जीत में
किंचित नहीं भयभीत मैं
संधर्ष पथ पर जो मिले यह भी सही वह भी सही।
वरदान माँगूँगा नहीं।।

मेरा ट्रेड मुझे लाभ दे या नुकसान, मैं अपने निर्णय के हिसाब से, अपनी रणनीति के हिसाब से ही ट्रेड करूंगा. और इस क्रम में जो भी परिणाम आए मैं उसका स्वागत करूंगा. किसी दूसरे की सलाह पर मैं कोई सौदा नहीं करुंगा.

लघुता न अब मेरी छुओ
तुम हो महान बने रहो
अपने हृदय की वेदना मैं व्‍यर्थ त्‍यागूँगा नहीं।
वरदान माँगूँगा नहीं।।

मेरी अनुभव हीनता का आभास दिलाना जरुरी नहीं. तुम बहुत बड़े वणिक हो बने रहो, मैं अपनी स्वंय की रणनीति का त्याग नहीं करने जा रहा. किसी भी स्थिति में मैं आपसे सलाह नहीं मांगने जा रहा.

चाहे हृदय को ताप दो
चाहे मुझे अभिशाप दो
कुछ भी करो कर्तव्‍य पथ से किंतु भागूँगा नहीं।
वरदान माँगूँगा नहीं।।

तुम मुझे कितना भी बेवकूफ समझो. मुझे कितना भी बुरा भला कहो पर मैं अपनी योजना,  अपनी रणनीति छोड़ने नहीं जा रहा. किसी भी स्थिति मे मैं आपसे सलाह नहीं लेने जा रहा.

आप को भी लगता होगा कि यह शैली तो निश्चित गर्त में ले जायेगी. पर यह उतना निश्चित भी नहीं जितना आप इसे बतलाने की कोशिश करेंगे. अपनी रणनीति पर टिके रहने का अर्थ यह नहीं होता कि आप अपने अस्त्रों को धार देना बन्द कर देंगे. बढ़िया से बढ़िया रणनीति भी शत प्रतिशत सफलता नहीं देती. आप को अपने पसन्द की रणनीति, अपनी क्षमता के अनुसार योजना बनाना ही होगा. जैसे जैसे आप इस मार्ग पर आगे बढ़ते जायेंगे आप अपनी असफलताओं से सीखते भी जायेंगे और तदनुसार अपनी योजना में अेक्षित सुधार भी करते जायेंगे.

और शोध प्रबन्ध लिखने बैठने से पहले जरुरी है कि आपने अपनी शुरुआत ककहरा सीख कर ही करें. गुरु से ज्ञान लेना चाहिये पर अपने मार्ग पर उस ज्ञान का प्रयोग अपने अनुभवों से परिमार्जित भी करते रहना चाहिये.


Wednesday, March 5, 2025

मरी बिल्ली की उछाल

हिन्दी में इस शीर्षक को समझने के लिए अगर "डेड कैट बाउन्स" कहा जाय तो शेयर चर्चा करने वाले लोग सहजता से समझ लेंगे. कल और आज शेयर बाजार में सुधार के लक्षण दिखाई दे रहे हैं. पर जानकार सलाहकारों की चेतावनी है कि यह मरी बिल्ली की उछाल भी हो सकती है. अगर मरी बिल्ली काफी ऊँचाई से गिरे तो गिरने के बाद उछलती दिख सकती है, या यों कहिये कि लग सकती है.

सो मैंने देखना चाहा कि पिछले सात आठ साल की निफ्टी की चाल देख ली जाय. लम्बी अवधि के इस चार्ट को देखने के लिये मैंने साप्ताहिक कैन्डल का चुनाव किया और परिणाम आपके सामने है -


इस चार्ट को देखने के बाद आप भी मानेंगे तो देश के शेयर बाजार में कोई बहुत बड़ी अनहोनी नही हो गई है. बाजार कभी सीधी रेखा में नहीं चलता. कभी ऊपर तो कभी णीचे मगर लम्बी अवधि में यह ऊपर जाता हुआ ही दिखेगा. इसी कारण बाजार की कहावत है कि खरीदो और भूल जाओ. छह सात आठ साल के बाद देखोगे तो निवेश के सारे तरीके इसके सामने गौण हो जायेंगे.

मगर क्या यह हमेशा ही सच होता है ? जीवन्त भाषा की तरह शेयर बाजार की भाषा भी नये नये कहावत गढ़ती है. पहले के जमाने में शेयर निवेश का यही तरीका प्रचलित था कि खरीद लो और बने रहो - Buy and Hold ! तब के निवेशक कहीं और से नियमित आय प्राप्त करते थे और अपनी बचत का एक छोटा हिस्सा शेयरों में निवेशित कर के रखते थे. उन निवेशकों का जमाना बदल रहा है. अब शेयर बाजार में नौजवानों की संख्या बहुत अधिक हो गई है और यह वर्ग चट मंगनी पट व्याह की बात अधिक पसन्द करता है. जन्म जन्मान्तर का संबंध अब अपवाद होने लगा है. अब तो लिव इन का दौर आ गया है. इस लिये बाजार की वह कहावत अब उतनी प्रभावी नहीं रह गई है खास कर उन लोगों के लिये जो अपना खर्च शेयर बाजार से निकालने की जुगत भिड़ाते रहते हैं.

ऊपर दिये गये इस चित्र से आप भी मानेंगे कि जब इस उर्ध्वगामी समानान्तर चैनल की उपरी रेखा के पास पॅहुचे तो निकल जाईये और जब निचली रेखा के पास पँहुचे तो नया निवेश कर डालिये. पर यह बात कहने में जितना आसान है, व्यवहार में उतना ही कठिन. मगर अभ्यास से आप इसे सहजता से प्राप्त करने लग सकते हैं, बशर्ते आप बिल्कुल शीर्ष पर बेचने और निम्नतम स्तर पर खरीदने की कुचेष्टा नहीं करें. जब आपको लगे कि बाजार बहुत तेजी से ऊपर जा रहा है तो कुछ कुछ निवेश समाप्त करते रहिये. और जब लगे कि बहुत नीचे गिर रहा है तब खरीदने की सोचिये. हाँ एकमुश्त बेचने या खरीदने की गलती मत करें. निवेश योग्य राशि पूरी की पूरी शेयरों में मत लगायें. एक उदाहरण जो मैं नौजवानों को बताता हूं वह यही कि जब आपका निवेश एक साल के फिक्स्ड डिपाजिट पर मिलने वाले ब्याज की बराबरी कर ले तब उसे एक बार तोड़ दें. हजारों स्टॉक हैं शेयर बाजार में और हर दिन कोई न कोई स्टॉक उपर जाता मिल जायेगा या नीचे गिरता मिल जायेगा. एक निवेश भँजा कर दुसरे निवेश में लगाना ज्यादा लाभदायक हो सकता है. बाकी आपकी अपनी मर्जी.

Tuesday, March 4, 2025

रहे न जब सुख के दिन ही तो...

रहे न जब सुख के दिन ही तो, कट जायेंंगे दुख के दिन भी.

प्रकृति में कुछ भी स्थायी नहीं होता. दिन के बात रात, रात के बाद दिन का क्रम अहर्निश चलते रहता है. मौसम बदलता रहता है - ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमन्त, शीत, और वसन्त. एक के बाद दूसरा मौसम आते रहता है. अलग बात है कि कुछ जगहे ऐसी भी होती हैं जहाँ सबेरे जाड़ा, दिन में गरमी, और शाम को बारिश देखने को मिल जाती है. मगर अपवाद हर नियम का हुआ करता है.

शेयर बाजार भी अजब जगह है. यहाँ जब दाम गिरते हैं, स्टॉक सस्ते हो जाते हैँ तो खरीददार नजर नहीं आते. और जब स्टॉक मंहगा होेने लगता है तो खरीददारों की लाइन लगने लगती है. अंडा पहले या मुर्गी पहले वाले सवाल की तरह इसका भी उत्तर मुश्किल से मिल पाएगा कि स्टॉक सस्ते क्यों हो जाते हैं. खरीददारों की कमी सस्ती ले आकर आती है या सस्ती के कारण खरीददार गायब हो जाते हैँ.

पर बाजार तभी चलता है, सौदा तभी होते हैँ जब कोई खरीददार हो और कोई बेचने वाला हो. बेचने वाले हर मूल्य पर मिल जाते हैँ और खरीदने वाले भी हर मूल्य पर मिल जाते हैं. खरीददार कम हों और कोई बेचने वाला हो तो उसकी वस्तु का मू्ल्य औने पौने होने लगता है. और जब स्टॉक के मूल्य आसमान छूते जैसे लगते हैं तो बेचने वालों की कमी होने लगती है. डर और लालच शेयर बाजार के मूल तत्व होते हैं. अगर किसी को लगता है कि यह स्टॉक अभी और गिरेगा तो वह बेच कर निकलना चाहता है और खरीददार सोचता है कि क्या जल्दबाजी है. बाद में जब और सस्ता हो जाय तब खरीद लेंगे. उसी तरह जब खरीदार अधिक होने लगते हैँ तो बेचने वाला सोचता है कि थोड़ी देर और देख लेता हूं, हो सकता है कि और उपर जाय. स्टॉक मूल्य की कोई उपरी सीमा नहीं होती, पर नीचे की सीमा सबका मालूम है कि शून्य के नीचे नहीं जा सकता. इस लिये खरीदने वाले को मालूम रहता है कि उसका जोखिम कितना है. पर बेचने वाले के जोखिम की कोई सीमा नहीं होती. इसलिये शेयर बाजार में बिकवाल अधिकतर फायदे में रहते हैं, पर जब नुकसान होता है तो हो सकता है कि वह बरबाद हो जाय. खरीदने वाला जानता है कि अधिक से अधिक यह मूल्य हीन हो सकता है पर उपर जाने की संभावना असीम है. यही उहापोह बाजार को चलायमान रखता है.

कुछ देर के लिये मूल मूद्दे से हट रहा हूं. मोदी पर अक्सर यह आरोप लगता है कि उन्होंने चुनाव में वायदा किया था कि हर नागरिक के खाते में पन्द्रह लाख रुपये आ जायेंगे अगर विदेशों में जमा भारत का कालाधन वापस आ जाय तो. उनके समर्थक यह कहते हैँ कि यह सिर्फ एक आंकड़ा था, वादा नहीं. चलिये थोड़ी देर के लिये मान लेते हैँ कि हर आदमी के खाते में पन्द्रह लाख आ जाते तो क्या होता ? सारे उद्योग धंधे, व्यापार बन्द हो जाते. आपको न तो नौकर मिलता, न रसोईया, न ड्राइवर, न माली, न चौकीदार. मिडास वाली कहानी तो हम सबने पढ़ी ही है जिसके छूने से हर वस्तु, जीव सोने का हो जाता था. परिणाम यह हुआ कि उसकी बेटी सोने की मूर्रत बन गई. वह न तो कुछ खा पाता था, न पी पाता था. बहुत मुश्किल से उसने इस वरदान से मुक्ति पाई थी.

ठीक उसी तरह मान लीजिये कि किसी भी स्टॉक का मूल्य कभी गिरेगा नहीं, हमेशा चढ़ता ही जायेगा तो बेचता कौन ? और कोई खरीद कैसे पाता ? अगर सबको पता रहे कि स्टॉक की कीमत गिरती हो चली जायेगी तो उसे कोई बेच कैसे पाता ? इस लिये बाजार कभी स्थायी नहीं रहता, हमेशा उतार चढ़ाव देखता-दिखाता रहता है. आजकल जब शेयर बाजार रोज नई गहराई में धँसता जा रहा है तब किसी को अपनी गलती ध्यान में नहीं आती कि जब वह सौ का स्टॉक तीन सौ, या तीन हजार मेंं ले कर बैठा हुआ था तब उसे बेचने का विचार उसके मन में कभी नहीं आया. सो अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत!

पर निराश मत होईये. रहे न जब सुख के दिन ही तो कट जायेंगे दुख के दिन भी ! पर भविष्य में ध्यान रखियेगा कि बीच बीच में अपना लाभ उठाते रहना है. हजार पाँच सौ का नोट कब बन्द हो जायेगा पता नहीं. सो बीच बीच में छुट्टा कराते रहियेगा.

दूसरे शेयर बाजार वणिकाई की जगह है या निवेश का माध्यम. जैसे निवेश के हजारों तरीके हैं और हर तरीके में मुनाफा इसी से तय होता है कि उसमें जोखिम कितना है. सरकार के बाण्ड सबसे कम ब्याज देते हैं, फिक्स्ड डिपाजिट उससे ज्यादा. जितनी लंबी अवधि का डिपाजिट कराइयेगा उतना ज्यादा ब्याज मिलेगा. जिस बैँक या उद्योग में जोखिम अधिक होगा वह आपको अधिक ब्याज देने का वादा करता है. इसलिये शेयर बाजार में बीच बीच में अपना मुनाफा कैश करते रहिये. अगर आप बैंकों से मिलने वाले सालाना ब्याज जितना मुनाफा कुछ दिन, कुछ हफ्ते, कुछ महीनों में अर्जित कर लेते हैं अपने स्टॉक से तो उसे बेच डालिये. कल फिर मौका मिल सकता है, इस में नहीं तो उसमें. अधिकतर मामलों में हर स्टॉक उपर नीचे होता ही रहता है.

शेयर बाजार में खरीद बेच करने वाले कुछ लोग कंपनी का फंडामेंटल देखते हैं तो कुछ लोग सिर्फ उसके मूल्य की चाल. मेरे विचार से क्या खरीदना है यह फंटामेंटल से तय करिये मगर कब खरीदना है या कब बेच डालना है इसके लिये टेक्निकल का सहारा लीजिये. वैसे अधिकतर ट्रेडर सिर्फ तकनीकी चाल के आधार पर सौदा किया करते हैं. उनमें से अधिकतर लोग आज का सौदा आज ही सलटा लेने में भरोसा रखता हैं. क्या पता कल क्या हो? कल का सौदा कल देखेंगे.

जब गली चौराहे, नुक्कड़ पर, चाय की दूकान पर, पानवाले के सामने शेयर बाजार की चरचा चलने लगे तो सावधान हो जाईये. जब हर आदमी खरीदने की बात करे, निवेश करने का इरादा जताने लगे, अपने मुनाफे की डींग हांकता मिल जाय तो जान जाईये गिरावट के दिन दूर नहीं हैं. और जब हर कोई माथा पीटता मिल जाये, हर कोई यही सवाल करने लगे कि क्या किया जाय? क्या सब कुछ बेच कर निकल लिया जाय? तब प्रफ्फुलित हो जाईये. शेयर खरीदने का सबसे बढ़िया समय यही होता है. याद रखिये बाजार बन्द नहीं हो रहा. कल फिर खुलेगा. मुँह माँगा दाम दीजिये मत और बेकसी में, मजबूरी में बेचिये मत.

रहिमन चुप ह्वै बैठिये, देखि दिनन के फेर,
जब नीके दिन आइहें, बनत न लगिये देर.

हां अगर मछली मारने नहीं आता तो बंसी डालने की मत सोचिये, बाजार से खरीद लाइये. अगर स्वंय फैसला नहीं ले सकते तो किसी दूसरे की सलाह पर अपनी पूंजी निवेशित मत करिये. म्युचुअल फंड, ईटीएफ में निवेश करिये. खाना बना नहीं सकते तो होटल में ढाबा में जाकर खा लीजिये, वरना कड़की में आटा गीला होते देर नहीं लगती, सब्जी जलने या चावल अधपका होने का जोखिम क्यों लीजिये. हाँ किसी से ट्रेडिंग की शैली सीखने में कोई हर्ज नहीं. मगर हमेशा याद रखिये कि कोई तरीका न तो आज तक बन पाया है, न भविष्य में बनने वाला है जो आपको हमेशा लाभ देगा. इसलिये अपने ट्रेनर को दोष मत दीजिये. डॉक्टर के हाथ में सिर्फ प्रयास करना होता है कि मरीज ठीक हो जाय. पर ठीक हो ही जायेगा इसकी गारंटी किसी भी डॉक्टर के पास नहीं मिलेगी. अगर ऐसा संभव होता तो कोई डाक्टर मरता नहीं !

बात लंबी खींच गई. कैसा लगा, बताना मत भूलियेगा.

 

Saturday, December 21, 2024

रोजाना पन्द्रह मिनट देकर ट्रेड कैसे करें ?

बहुत से ऐसे लोग होते हैं जो शेयर ट्रेडिंग करना तो चाहते हैं पर समयाभाव का कारण ऐसा नहीं कर पाते. अगर आप भी उन्हीं में से एक हैं तो मैं आपको बताना चाहूंगा कि मात्र पन्द्रह मिनट लगा कर आप शेयर ट्रेडिंग कर सकते हैं. और वह भी अपराह्न तीन बजे से सवा तीन बजे के बीच.


मैँ यह मान कर चल रहा हूं कि आपके पास एक डीमैट खाता है और आप किसी ब्रोकर प्लेटफार्म का उपयोग करते हैं. आपके ब्रोकर ने आपको चार्ट की सुविधा भी दे रखी होगी.


कोई भी रणनीति बताने के पहले यह बता देना आवश्यक है कि हर रणनीति में नुकसान का अंदेशा मौजूद रहता है. बिना नुकसान के अंदेशे वाली कोई रणनीति अबतक नहीं बन पाई है. और कभी बन भी नहीँ पायेगी क्योंकि यह असम्भव है. शेयर ट्रेडिंग में नुकसान का खतरा हमेशा है. आपको हमेशा इस हो सकने वाले नुकसान के बारे में सचेत रहना ही होगा.


यह मेरी नीति है कि मैं किसी कंपनी विशेष या स्टॉक विशेष का नाम नहीं लेता. मेरी रणनीति आप अपने किसी भी पसंदीदा स्टॉक पर उपयोग कर सकते हैँ. दूसरे मैँ कोई टीप नहीं देता. आपको अपना शेयर स्वंय चुनना होगा. कितना खरीदना है, कब खरीदना है, कितना नुकसान हो सकता है, कब बेचें, कितना मुनाफा हो सकता है यह सब आपको स्वंय तय करना होगा.


ट्रेडिंग के लिये वे स्टॉक बेहतर होते हैं जिनमें बड़ी संख्या में शेयरों की खरीद-बिक्री होती है. स्टॉक जितना वोलाटाइल (ज्यादा उतार-चढ़ाव दिखाने वाला) होगा, ट्रेडिंग के लिये उतना ही बेहतर होता हे.
 

अब अपने ब्रोकर के प्लेटफार्म पर दिये चार्ट को खोलिये और उस पर दो संकेतक, indicators, लगा दीजिये -

 Donchian Channel  और RSI
 
 RSI की सेटिंग नीचे दिये चित्र की तरह कर दें. रंग आप अपनी पसन्द का चुन लें.
 






 


 

 

 

 

 

 

 

 

Donchian Channel  की सेटिंग इस चित्र के अनुसार कर लें.


  



  

 

 

 

 

 

 

 

चार्ट का timeframe एक कैन्डल एक दिन का daily चुन लें.
  अपने वाच लिस्ट में दस ऐसे स्टॉक चुन लें जिनमें आप ट्रेड करना चाहते हैं.
  अपने कैपिटल को दस भाग में बाॅट लें. एक सौदा एक भाग का करें.
  हो सकता है इस रणनीति में आपको रोज का सौदा नहीं मिले, पर मुनाफा इस की भरपाई कर देगा.
 
इस तइयारी के बाद अपराह्न तीन बजे अपना वाच लिस्ट देखें. जो स्टॉक सबसे ज्यादा गिरा हो उसको अपने चार्ट पर लगायें और देखें कि उस स्टॉक का मौजुदा मूल्य नीचे वाली रेखा के नीचे है (पीले वृत में) और अभी कैन्डल पूरा बना नहीं है. कन्फर्मेशन के लिये इस समय  RSI की वैल्यू दस के आसपास मिलना चाहिये. डेली कैन्डल शाम साढ़े तीन बजे पूरा होगा पर आप आखिरी पन्द्रह मिनट की भीड़ से अलग रहिये. सवा तीन बजे आप वह स्टॉक मार्केट रेट पर खरीद लें. तीन बजे से सवा तीन बजे के बीच आपका काम पूरा हो गया.

अगले दिन फिर तीन बजे अपना चार्ट खोलें. जिस दिन उसका रेट उपर वाली रेखा पार कर गयी हो और  RSI की वैल्यू 80 से ( उपर वाले वृत में) ज्यादा हो. उस दिन सवा तीन बजे मार्केट रेट पर बेच दें. उस दिन तक इंतजार करें जब तक स्टॉक का मूल्य उपर वाली रेखा से उपर और  RSI की वैल्यू 80 से पार मिल जाय. बस उस दिन आप इस सौदे को निपटा दीजिये.

यह क्रम तब तक चलाते रहिये जब तक आपके कैपिटल के दसो हिस्से निवेशित नहीं हो जाते. इस रणनीति में आपको स्टॉपलॉस नहीं लगाना पड़ेगा. हाँ इन्तजार लंबा हो सकता है. प्रोफिट बुकिंग भी पूरा ले कर ही मिलेगा.

अगर आपको अपनी जिज्ञासा का उत्तर नहीं मिल रहा तो नीचे कमेंट बॉक्स में अपना प्रश्न लिख दें. मैं पूरी कोशिश करुंगा कि अगले दिन आपके प्रश्नों का उत्तर दे सकूं. बस मुझसे यह मत पूछियेगा कि कौन सा स्टॉक खरीदें. इस प्रश्न का उत्तर मैं आपको नहीं दे सकता क्योंकि यह नीतिविरुद्ध होगा.

बैठा बनिया क्या करे, इस डेहरी से उस डेहरी में

बात आगे बढ़ाऊँ उससे पहले रहीम का एक दोहा याद दिला रहा हूं। रहीम जी ने कहा था - रहिमन चुप ह्वै बैठिए देखि दिनन को फेर। जब नीके दिन आइहें बनत ...