आज बहुत दिन बाद, लगभग दो महीने के बाद, आज फिर आपके सम्मुख हूं अपने अनुभवों को साझा करने के लिए.
हर बार मैं यह पहले ही स्पष्ट कर देता हूं कि मैं न तो कोई रिसर्च एनलिस्ट हूं ना इन्वेस्टमेट एडवाइजर. मैं एक जिद्दी वणिक (trader) हूं जिसने पिछले बीस साल में लाखों का नुकसान उठाया है मगर फिर भी लगा रहता है.
आज मुझे गाइड फिल्म का वह गीत याद आ रहा है -
वहां कौन है तेरा मुसाफिर जाएगा कहाँ?
दम ले ले घड़ी भर ये छइयाँँ पाएगा कहाँँ?
यह गीत मुझे यही सदेश देता लगता है कि हे वणिक, शेयर बाजार की तरफ क्यो जा रहा है? वहां तेरा है कौन? इसलिए थोड़ी देर यहीं विश्राम कर मेरी बात सुन. यह सब कुछ और कहाँ मिलेगा?
पर ऐसी जानकारियों से तो सारे सोशल मीडिया प्लेटफार्म भरे पड़े हैं. बहुतों के पास बहुत सी जानकारियाँ है जो वो आपको बताना चाहते है, पर उनमें से अधिकतर की मंशा यही होती है कि आप उनका ग्रुप ज्वायन कर लें और उनकी सलाह के अनुसार वणिकई (trading) कर के उन्हीं की तरह लाखों करोड़ों कमा लें. अलग बात है कि उनमें से बहुत सारे गुरु कम गुरुघंटाल ज्यादा होते है. कभी जब सेबी के दायरे में आते हैं तो पता चलता है कि इन्होंने ट्रेडिंग में तो नुकसान उठाया है पर ट्रेडिंग सिखाने के नाम पर करोड़ों जरुर कमाये है.
मै कोई गुरु या गुरुघंटाल नहीं हूं. मैं आपकी ही तरह का एक वणिक हूं जो वणिकई से अपना खर्च निकालने की कोशिश कर रहा है. अलग बात है कि आज तक निकाल नहीं पाया हूं. फिर आखिर मै आपको बताना क्या चाहता हूं? यही कि कोई रणनीति (STRATEGY) , कोई इन्स्ट्रूमेंट (इक्विटी, आप्शन, कमोडिटी, करेंसी, क्रिप्टो वगैरह), कोई संकेतक (INDICATOR) ऐसी नहीं जिसमें नुकसान नहीं होता हो. ऐसा हो भी नहीं सकता, क्योंकि जिस दिन ऐसा हो गया वह दिन बाजार का अंतिम दिन होगा.
तो फिर एक वणिक करे क्या? हर सौदा (trade) एक लड़ाई की तरह होता है और वणिकई (trading) एक युद्ध की तरह. अधिक लड़ाई हारते हुए भी आप युद्ध जीत सकते हैं और अधिक लड़ाई जीतने के बाद भी आप युद्ध हार सकते हैं. अधिक सौदो में नुकसान उठा कर भी आप एक सफल वणिक हो सकते हैं और अधिकतर सौदों में लाभ उठाने के बाद भी आपकी वणिकई नुकसान दे सकती है.
सबसे पहले तो आप यह मान लीजिए कि कुछ भी हो सकता है. आप जो भी संकेतक चाहें उसका उपयोग कर सकते हैँ, जो भी रणनीति बनायें उस पर काम कर सकते है. आपकी पसन्द सर्वश्रष्ठ होगी क्योंकि वह आपके हिसाब से होगी. आप सिर्फ उस तरह से सौदा करें जिसमें आप अगले दिन भी बाजार में उतर सकें. अपनी सारी पूंजी किसी एक सौदे पर, किसी एक इंस्ट्रूमेंट पर नहीं लगायें. अपनी नुकसान को छोटा रखें पर अधिक मुनाफे की चाहत भी मत करें. स्टॉपलॉस की तरह ही स्टॉपगेन भी आपके काम आएगा. अगर आपके पास पूंजी कम है, नियमित आय का स्रोत नहीं है तो इन्वेस्टमेंट की मत सोचें. और अगर ट्रेडिंग करना है तो फिर सिर्फ ट्रेडिंग करिए. दोनों अलग अलग शैली हैं और दोनों को अलग अलग तरह से उपयोग में लाया जाता है.
ट्रेडिंग के लिए आपको फंडामेंटल का जानकार होने से ज्यादा लाभकर होगा टेक्निकल जानकारी. कई बार व्हिमसिकल जानकारी भी काम कर जाती है ठीक उसी तरह जैसे कोई बन्द घड़ी दिन भर में दो बार सही समय बता देती है.
मैं आप्शन ट्रेड करता हूं और वह भी खरीदार बन कर. जानता हूँ कि बिकवाल अधिकतर बार फायदे में रहते है. पर यह भी जानता हूं कि आप्शन सेलर या राइटर बनने के लिए पूंजी अधिक चाहिए होती है. इसमें लाभ की तो सीमा होती है पर नुकसान की कोई सीमा नहीं होती. जबकि आप्शन खरीदने के लिए कम पूंजी की जरुरत होती है. इसमें नुकसान की सीमा तय होती है - जितने में आपने आप्शन खरीदा वह पूरा का पूरा शून्य हो सकता है, पर उससे ज्यादा नुकसान नहीं हो सकता अगर आप इंडेक्स आप्शन खरीदते हैं. इक्विटी आप्शन खरीदना आपको बरबाद कर सकता है अगर आप उसे समय पर बेच नहीं पाते हैं तो. इंडेक्स आप्शन कैश में निपटाए जाते हैं सो इसमें जोखिम आपकी प्रीमियम से अधिक नहीं हो सकता.
लोग कहते हैं कि आप्शन में थीटा, गामा, डेल्टा, वेगा वगैरह का ज्ञान होना जरुरी होता है. पर मैं नहीं मानता. इक्विटी में भी दाम किसी भी समय गिर सकता हे, गिरता उठता रहता भी है. आप जब कुछ खरीदते होते हैंं तो जरुरी होता है कोई आपको वह बेचने के लिए तैयार भी हो. यानि जब आपको लगता है कि इसका मूल्य बढ़ने वाला है तो उसी समय कोई यह सोच रहा होता है कि ना, अब इसका मूल्य गिरने वाला है. तभी वह सौदा होता भी है.
आप्शन में बेचने वाला दीर्घकालिक योजना बना कर चलता है. क्योंकि उसे मालूम है कि समय के साथ इसका संभावना मूल्यांश (extrinsic value) घटते ही जाना है. पर आप्शन खरीदने वाले को इसी फिराक में होना चाहिये कि जितनी जल्द हो सके उसे बेच दे. यह तो आपको भी पता होगा ही कि आप्शन प्रीमियम में दो अंश होते हैं - तात्कालिक मूल्यांश (intrinsic value) और संभावना मूल्यांश. उदाहरण कि लिए अगर कोई इंडेक्स 5000 पर चल रहा है और आप उसे 6000 पर बेचना चाहते हैं तो उस आप्शन का जो प्रीमियम होगा उसमें 1000 तो सीधे तात्कालिक मूल्यांश होगा और उसके ऊपर संभावना मूल्यांश. आप्शन बेचने वाला उसकी निपटान अवधि (settlement date or expiry date) की प्रतीक्षा में रहता है जबकि आप्शन खरीदने वाले की चेष्टा यही रहनी चाहिए कि जैसे ही काम भर मुनाफा मिले बेच कर निकल ले. अचानक से उछाल आए तो खरीदे नहीं और अचानक से गिरे तो बेचे नहीं. अगर अचानक और तेज उछाल आया है तो पुट आप्शन खरीदने की सोचिए, अचानक और तेज गिरावट हो तो कॉल आप्शन खरीदने की सोचिए.
ध्यान रहे कि मैं सोचने की बात कर रहा हूं खरीदने या बेचने की नहीं. खरीदना या बेचना आपकी रुचि पर आपके विचार पर है.
अगर आप कोई संकेतक या रणनीति चाहते हैं तो नीचे कमेंट लिख दीजिए. मैं आपको हजारों संकेतक सैकड़ों रणनीति में से कोई भी एक बता सकता हूँ और सबके सब में मुनाफा या नुकसान की कमोबेश एक बराबर संभावना होगी. आप युद्ध जीतना चाहते हैंं तो छोटी छोटी लड़ाई हारते रहिए और छोटी छोटी जीत लेते रहिए. कम से कम एक सौ सौदे करने के बाद ही फैसला लीजिए कि यह रणनीति सही है या गलत. एक बार फिर दोहरा देता हूं कि मुनाफा आपके अनुशासन पर निर्भर करेगा, आपके खुद के डर और लालच की सीमा पर निर्भर करेगा. क्योंकि ज्यादा जोखिम मतलब ज्यादा मुनाफा और ज्यादा मुनाफा मतलब ज्यादा जोखिम !
चलते चलते यह भी बता देना चाहता हूं कि पुट सेल करना या कॉल खरीद लेना एक जैसा ही होता है और कॉल सेल करना या पुट खरीदना भी एक जैसा ही होता है. खरीदने वाले के लिए लाभ कि कोई सीमा नहीं और बेचने वाले के लिए नुकसान की कोई सीमा नहीं. सेलर चूंकि ज्यादा जोखिम लेते हैं सो उनको मुनाफा भी अधिक होता है. और आप्शन खरीदने वाले चूंकि ज्यादा मुनाफा चाहते हैं तो उनके लिए जोखिम भी ज्यादा होता है. बात समझ में आ गई हो तो बधाई और शुभकामनाऐं. अगर समझ में नहीं आई तो दुबारा पढ़िए, कमेंंट में सवाल लिखिए.





