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Thursday, January 22, 2026

ज्यादा जोखिम मतलब ज्यादा मुनाफा या....

 आज बहुत दिन बाद, लगभग दो महीने के बाद, आज फिर आपके सम्मुख हूं अपने अनुभवों को साझा करने के लिए.

हर बार मैं यह पहले ही स्पष्ट कर देता हूं कि मैं न तो कोई रिसर्च एनलिस्ट हूं ना इन्वेस्टमेट एडवाइजर. मैं एक जिद्दी वणिक (trader) हूं जिसने पिछले बीस साल में लाखों का नुकसान उठाया है मगर फिर भी लगा रहता है.

आज मुझे गाइड फिल्म का वह गीत याद आ रहा  है -
वहां कौन है तेरा मुसाफिर जाएगा कहाँ?
दम ले ले घड़ी भर ये छइयाँँ पाएगा कहाँँ?


यह गीत मुझे यही सदेश देता लगता है कि हे वणिक, शेयर बाजार की तरफ क्यो जा रहा है? वहां तेरा है कौन? इसलिए थोड़ी देर यहीं विश्राम कर मेरी बात सुन. यह सब कुछ और कहाँ मिलेगा?

पर ऐसी जानकारियों से तो सारे सोशल मीडिया प्लेटफार्म भरे पड़े हैं. बहुतों के पास बहुत सी जानकारियाँ है जो वो आपको बताना चाहते है, पर उनमें से अधिकतर की मंशा यही होती है कि आप उनका ग्रुप ज्वायन कर लें और उनकी सलाह के अनुसार वणिकई (trading) कर के उन्हीं की तरह लाखों करोड़ों कमा लें. अलग बात है कि उनमें से बहुत सारे गुरु कम गुरुघंटाल ज्यादा होते है. कभी जब सेबी के दायरे में आते हैं तो पता चलता है कि इन्होंने ट्रेडिंग में तो नुकसान उठाया है पर ट्रेडिंग सिखाने के नाम पर करोड़ों जरुर कमाये है. 

मै कोई गुरु या गुरुघंटाल नहीं हूं. मैं आपकी ही तरह का एक वणिक हूं जो वणिकई से अपना खर्च निकालने की कोशिश कर रहा है. अलग बात है कि आज तक निकाल नहीं पाया हूं. फिर आखिर मै आपको बताना क्या चाहता हूं? यही कि कोई रणनीति (STRATEGY) , कोई इन्स्ट्रूमेंट (इक्विटी, आप्शन, कमोडिटी, करेंसी, क्रिप्टो वगैरह), कोई संकेतक (INDICATOR) ऐसी नहीं जिसमें नुकसान नहीं होता हो. ऐसा हो भी नहीं सकता, क्योंकि जिस दिन ऐसा हो गया वह दिन बाजार का अंतिम दिन होगा.

तो फिर एक वणिक करे क्या? हर सौदा (trade) एक लड़ाई की तरह होता है और वणिकई (trading) एक युद्ध की तरह. अधिक लड़ाई हारते हुए भी आप युद्ध जीत सकते हैं और अधिक लड़ाई जीतने के बाद भी आप युद्ध हार सकते हैं. अधिक सौदो में नुकसान उठा कर भी आप एक सफल वणिक हो सकते हैं और अधिकतर सौदों में लाभ उठाने के बाद भी आपकी वणिकई नुकसान दे सकती है. 

सबसे पहले तो आप यह मान लीजिए कि कुछ भी हो सकता है. आप जो भी संकेतक चाहें उसका उपयोग कर सकते हैँ, जो भी रणनीति बनायें उस पर काम कर सकते है. आपकी पसन्द सर्वश्रष्ठ होगी क्योंकि वह आपके हिसाब से होगी. आप सिर्फ उस तरह से सौदा करें जिसमें आप अगले दिन भी बाजार में उतर सकें. अपनी सारी पूंजी किसी एक सौदे पर, किसी एक इंस्ट्रूमेंट पर नहीं लगायें. अपनी नुकसान को छोटा रखें पर अधिक मुनाफे की चाहत भी मत करें. स्टॉपलॉस की तरह ही स्टॉपगेन भी आपके काम आएगा. अगर आपके पास पूंजी कम है, नियमित आय का स्रोत नहीं है  तो इन्वेस्टमेंट की मत सोचें. और अगर ट्रेडिंग करना है तो फिर सिर्फ ट्रेडिंग करिए. दोनों अलग अलग शैली हैं और दोनों को अलग अलग तरह से उपयोग में लाया जाता है. 

ट्रेडिंग के लिए आपको फंडामेंटल का जानकार होने से ज्यादा लाभकर होगा टेक्निकल जानकारी. कई बार व्हिमसिकल जानकारी भी काम कर जाती है ठीक उसी तरह जैसे कोई बन्द घड़ी दिन भर में दो बार सही समय बता देती है. 

मैं आप्शन ट्रेड करता हूं और वह भी खरीदार बन कर. जानता हूँ कि बिकवाल अधिकतर बार फायदे में रहते है. पर यह भी जानता हूं कि आप्शन सेलर या राइटर बनने के लिए पूंजी अधिक चाहिए होती है. इसमें लाभ की तो सीमा होती है पर नुकसान की कोई सीमा नहीं होती. जबकि आप्शन खरीदने के लिए कम पूंजी की जरुरत होती है. इसमें नुकसान की सीमा तय होती है - जितने में आपने आप्शन खरीदा वह पूरा का पूरा शून्य हो सकता है, पर उससे ज्यादा नुकसान नहीं हो सकता अगर आप इंडेक्स आप्शन खरीदते हैं. इक्विटी आप्शन खरीदना आपको बरबाद कर सकता है अगर आप उसे समय पर बेच नहीं पाते हैं तो. इंडेक्स आप्शन कैश में निपटाए जाते हैं सो इसमें जोखिम आपकी प्रीमियम से अधिक नहीं हो सकता. 

लोग कहते हैं कि आप्शन में थीटा, गामा, डेल्टा, वेगा वगैरह का ज्ञान होना जरुरी होता है. पर मैं नहीं मानता. इक्विटी में भी दाम किसी भी समय गिर सकता हे, गिरता उठता रहता भी है. आप जब कुछ खरीदते होते हैंं तो जरुरी होता है कोई आपको वह बेचने के लिए तैयार भी हो. यानि जब आपको लगता है कि इसका मूल्य बढ़ने वाला है तो उसी समय कोई यह सोच रहा होता है कि ना, अब इसका मूल्य गिरने वाला है. तभी वह सौदा होता भी है. 

आप्शन में बेचने वाला दीर्घकालिक योजना बना कर चलता है. क्योंकि उसे मालूम है कि समय के साथ इसका संभावना मूल्यांश (extrinsic value) घटते ही जाना है. पर आप्शन खरीदने वाले को इसी फिराक  में होना चाहिये कि जितनी जल्द हो सके उसे बेच दे. यह तो आपको भी पता होगा ही कि आप्शन प्रीमियम में दो अंश होते हैं - तात्कालिक मूल्यांश (intrinsic value) और संभावना मूल्यांश. उदाहरण कि लिए अगर कोई इंडेक्स 5000 पर चल रहा है और आप उसे 6000 पर बेचना चाहते हैं तो उस आप्शन का जो प्रीमियम होगा उसमें 1000 तो सीधे तात्कालिक मूल्यांश होगा और उसके ऊपर संभावना मूल्यांश. आप्शन बेचने वाला उसकी निपटान अवधि (settlement date or expiry date) की प्रतीक्षा में रहता है जबकि आप्शन खरीदने वाले की चेष्टा यही रहनी चाहिए कि जैसे ही काम भर मुनाफा मिले बेच कर निकल ले. अचानक से उछाल आए तो खरीदे नहीं और अचानक से गिरे तो बेचे नहीं. अगर अचानक और तेज उछाल आया है तो पुट आप्शन खरीदने की सोचिए, अचानक और तेज गिरावट हो तो कॉल आप्शन खरीदने की सोचिए. 

ध्यान रहे कि मैं सोचने की बात कर रहा हूं खरीदने या बेचने की नहीं. खरीदना या बेचना आपकी रुचि पर आपके विचार पर है. 

अगर आप कोई संकेतक या रणनीति  चाहते हैं तो नीचे कमेंट लिख दीजिए. मैं आपको हजारों संकेतक सैकड़ों रणनीति में से कोई भी एक बता सकता हूँ और सबके सब में मुनाफा या नुकसान की कमोबेश  एक बराबर संभावना होगी. आप युद्ध जीतना चाहते हैंं तो छोटी छोटी लड़ाई हारते रहिए और छोटी छोटी जीत लेते रहिए. कम से कम एक सौ सौदे करने के बाद ही फैसला लीजिए कि यह रणनीति सही है या गलत. एक बार फिर दोहरा देता हूं कि मुनाफा आपके अनुशासन पर निर्भर करेगा, आपके खुद के डर और लालच की सीमा पर निर्भर करेगा. क्योंकि ज्यादा जोखिम मतलब ज्यादा मुनाफा और ज्यादा मुनाफा मतलब ज्यादा जोखिम !

चलते चलते यह भी बता देना चाहता हूं कि पुट सेल करना या कॉल खरीद लेना एक जैसा ही होता है और कॉल सेल करना या पुट खरीदना भी एक जैसा ही होता है. खरीदने वाले के लिए लाभ कि कोई सीमा नहीं और बेचने वाले के लिए नुकसान की कोई सीमा नहीं. सेलर चूंकि ज्यादा जोखिम लेते हैं सो उनको मुनाफा भी अधिक होता है. और आप्शन खरीदने वाले चूंकि ज्यादा मुनाफा चाहते हैं तो उनके लिए जोखिम भी ज्यादा होता है. बात समझ में आ गई हो तो बधाई  और शुभकामनाऐं. अगर समझ में नहीं आई तो दुबारा पढ़िए, कमेंंट में सवाल लिखिए.

Monday, November 24, 2025

शेयर बाजार का क ख ग

 शेयर बाजार का क ख ग




मुझे गलतफहमी थी कि आज के युग में हर व्यक्ति को शेयर बाजार की आवश्यक जानकारी है. परन्तु एक व्यक्ति ने मेरी गलतफहमी दूर कर दी. आज के लेख में मैं अपने को शेयर बाजार के लिये व्यवहृत होने वाले कुछ शब्दों की परिभाषा तक सीमित करूंगा.

शेयर बाजार को हिन्दी में प्रतिभूति बाजार भी कहा जाता है. इस बाजार में कम्पनियों की हिस्सेदारी खरीदी या बेची जाती है. कंपनियाँ अरबों खरबों की हो सकती हैं पर उनुका  एक लघुतम हिस्सा बहुत कम पूंजी में खरीदा जा सकता है. इसी हिस्से को शेयर कहा जाता है. कंपनी की मौजूदा कीमत को उसके शेयरों की संख्या से विभाजित कर के शेयर का दाम निकाला जाता है. और शेयरों के वर्तमान मूल्य को शेयरों की कुल संख्या से गुणा कर के कंपनी का बाजार मूल्य या मार्केट कैपिटल निर्धारित होता है. 

भारत के शेयर बाजार को नियन्त्रित करने वाली संस्था है सेबी SEBI. इसका पूरा नाम भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड Securities and Exchange Board of India है. सेबी देश के प्रतिभूति बाजार पर नजर रखती है और इसे नियमित करती है. 

देश में तीन मुख्य शेयर बाजार हैं - नेशनल स्टॉक एक्सचेंज, बम्बई स्टॉक एक्सचेंज, और मेट्रोपोलिटन एक्सचेंज ऑफ इंडिया. और शेयर बाजारों में शामिल हैं - मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज, नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिभ एक्सचेंज, तथा इंडिया इंटरनेशनल एक्सचेंज. 

कई तरह की प्रतिभूतियों में खरीद बिक्री होती है जैसे कि कंपनियों के शेयर, कमोडिटी, करेंसी, क्रिप्टो, बुलियन, बॉण्ड वगैरह. मगर हमलोग अधिकतर इक्विटी (कंपनी शेयर) और उनके डेरिवेटिभ में ट्रेड करते हैँ. कुछ लोग करेंसी (फॉरेक्स), कमोडिटी (कपास, कच्चा तेल, फसल वगैरह) , बुलियन (सोना चाँदी), या क्रिप्टो करेंसी भी ट्रेड करते हैं.

शेयरों की सीधी खरीद बिक्री इक्विटी ट्रेड कही जाती हैँ. इन इक्विटी के आधार पर इनके डेरिवेटिभ जैसे कि फ्यूचर और आप्शन में भी बड़े पैमाने पर ट्रेड किया जाता है. 

शेयरों या प्रतिभूतियों की खरीद बिक्री एक्सचेंज पर होती है. एक्सचेंज ब्रोकरों से जुड़ा होता है और ट्रेड करने वाले इन ब्रोकरों से. देश के मशहूर ब्रोकरों में जिरोधा, ग्रो, पेटीएम मनी, आईसीआईसीआई सिक्यूरिटीज, एचडीएफसी सिक्यूरिटिज, एचडीएफसी स्काई वगैरह के नाम लिये जा सकते हैँ. इनके अलावा भी बहुत से ब्रोकर हैं. 

शेयर खरीदने या बेचने वाले अपने पसन्द के ब्रोकर के यहाँ खाता खोलते है. ब्रोकर आपकी पहचान सुनिश्चित करने के लिये आपका फोटो, आधार कार्ड, पैन कार्ड, हस्ताक्षर, और आपके बैंक खाते की जानकारी लेता है. शेयरों की खरीद बिक्री नकद नहीं हो सकती. रुपया आपके बैँक खाते से निकलेगा या  उसी खाते में जमा होगा. ब्रोकर आपका डीमैट खाता खोल देता है जहां आपके द्वारा खरीदे गये शेयर या प्रतिभूति रखे जाते हैं. जब आप इसे बेचते हैं तो वहीं से इन्हें निकाल लिया जाता है. डीमैट खातों का संचालन करने वाली संस्थाऐं हैं  National Securities Depository Limited (NSDL) और Central Depository Services Limited (CDSL). आपके द्वारा खरीदे गये शेयर ब्रोकर के पास न होकर इन डिपोजिटरीज में रखे जाते हैँ और ब्रोकर आपके शेयरों का गलत उपयोग नहीं कर सकते. जब आप अपने ब्रोकर से मार्जिन मनी लेते हैँ तो उसके लिये आप इन शेयरों को उनके नाम गिरवी pledge रख देते हैँ. इस प्रक्रिया के लिये डिपोजिटरीज सीधे आपसे स्वीकृति प्राप्त करती हैं. इस तरह आपका निवेश और पूंजी पूरी तरह सुरक्षित रहती है. इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी सेबी करता है. 

एक बार जब आपका डीमैट खाता खुल जाता है तब आप अपने ब्रोकर के एप या वेबसाइट पर जा कर शेयरों को खरीद या बेच सकते हैँ. 

शेयर तीन तरह से खरीदे बेचे जाते हैँ. डिलिवरी, इन्ट्राडे, और एमटीएफ के तहत. 

डिलिवरी में जब आप कोई शेयर खरीदते हैं तो आपको उसका पूरा मूल्य ब्रोकर को देना होता है और आपके खरीदे शेयर अगले दिन या दूसरे दिन आपके डीमैट खाते में आ जाते हैं. इन खरीदे गये शेयरों को आप उसके बाद ही बेच सकते हैं. पर कुछ ब्रोकर आपको आज खरीदो कल बेच दो वाली सुविधा भी देते हैं जिनका उपयोग कर आप इन शेयरों को डिलिवरी से पहले भी बेच पाते हैं. सामान्यतया डिलिवरी में खरीदे  गये शेयर उसी दिन बेचे नहींं जा सकते. डिलीवरी में जब आप कोई शेयर बेचते हैं तब वे शेयर आपके डीमैट खाते में उपलब्ध होने चाहिये. डिलीवरी में बेचे गये शेयरों को उसी दिन खरीदा नहीं जा सकता.

इन्ट्राडे में खरीदे या बेचे गये सौदों को उसी दिन बाजार बन्द होने से पहले निपटा लेना होता है वरना आपका ब्रोकर बिना आपकी परवाह किए उस सौदे को निपटा सकता है और इस प्रक्रिया में होने वाले नुकसान की भरपाई आपको करनी पड़ती है. 

मार्जिन पर खरीदे या बेचे गये सौदों का निपटान अपनी सुविधा या इच्छा से उसी दिन या बाद में भी किसी दिन कर सकते हैं. मार्जिन पर खरीदे गये शेयरों का मार्जिन अगर आपके ब्रोकर द्वारा दिया जाता है तो ब्रोकर आपसे उसका ब्याज वसूलता है. साथ ही प्रतिदिन इस मार्जिन को तय किया जाता है और अगर मार्जिन कम पड़ रहा हो तो आपको मार्जिन कॉल आयेगा और आपको तुरत वह  कमी दूर करनी पड़ेगी. अगर आप मार्जिन  की कमी पूरी नहीं कर पाते तो  आपका ब्रोकर आपका शेयर बिना पूछे बेच देगा और उससे होने वाले नुकसान की भरपाई भी आपको ही करनी होगी.

खरीदने या बेचबे के लिये शेयरो का चुनाव दो तरीको से किया जाता है. फंडामेंटल और टेकनिकल. फंडामेंटल विश्लेषण के लिये संबंधित कंपनी के काम, उसके मैनेजमेंट, उसकी वगैरह का निरीक्षण किया जाता है. यह विश्लेषण हर आदमी नहीं कर पाता. सो उनके लिये टेकनिकल विश्लेषण काम आता है. इस टेकनिकल विश्लेषण में शेयरों के मूल्य में आने वाले उतार चढ़ाव को देखा जाता है. इसे अधिकतर लोग कैंडल चार्ट देख कर करते हैं. मगर कैंडल का अलावा दूसरे तरीके भी होते हैं जैसे कि रेंको चार्ट, रेंज बार, कागो, लाइन चार्ट वगैरह,
कँडल चार्ट सबसे अधिक उपयोग में लाया जाता है.
 
टाइमफ्रेम का अर्थ होता है कि आप किस अवधि के कैंडल का उपयोग कर रहे है. कैन्डल चार बिन्दुओ   बनता है. पहला बिन्दू उस समयावधि में शुरु का मूल्य, अधिकतम मूल्य, न्यूनतम मूल्य, और आखिरी मूल्य के आधार पर कैंडल बनते हैं. इसे ओपन, हाई, लो, और क्लोज के नाम से भी जाना जाता है. स्वाभाविक है कि हर समयावधि में ये बिन्दू अलग अलग जगहों पर बनेंगे और हर समयावधि का कैडल अलग अलग हो सकता है.

टाइमफ्रेम का चयन ट्रेडिंग के तरीकों के आधार पर किया जाता है. अगर आप लगातार चार्ट देख सकते हैँ और आपको स्काल्पिंग या डे ट्रेडिंग करना हो तो यह समयावधि छोटी होती है. स्विंग पोजिशनल बाइ एंड होल्ड ट्रेडिंग में यह समयावधि सामान्यतया लंबी  रखी जाती है. जितने लबे समय तक आप इसे रखना चाहते हैँ उसी के अनुरुप समयावधि कम या अधिक रखी जाती है. 

स्काल्पिंग ट्रेडिंग बहुत कम अवधि के चार्ट के आधार पर की जाती है. इसके लिये सामान्यतया 1 मिनट से 3  मिनट तक की  अवधि चुनी जाती है. स्काल्पिंग करने के लिये बहुत अधिक पूंजी, तकनीकि दक्षता, और तीव्र गति से निर्णय लेने की क्षमता अनिवार्य जैसी होती है. 

डे ट्रेडिंग में एक ही दिन में शेयरों की खरीद बिक्री कर दी जाती है. इसके लिये अधिकतर लोग 5 मिनट से 25 मिनट तक का चार्ट देखते हैँ. 1, 3, 5, 15, 25 मिनट वाले चार्ट चुनने का एक कारण यह भी होता है कि हमारे देश में शेयर ट्रेडिंग सुबह 9:15 से अपराह्न 3:30 के बीच किया जाता है. यह अवधि कुल 375 मिनट की होती है जिसे 1,3,5,15, 25 से बराबर अवधि में विभाजित किया जा सकता है. 2, 4, 10 मिनट या अलग की अवधि में 375 को बराबर बराबर नहीं बाँटा जा सकता. और इसके कारण इंडिकेटरों के उपयोग में थोड़ा बहुत अन्तर आ जाता है. 

स्विंग ट्रेडिंग में नीचे के मूल्य पर खरीद कर उपर के मूल्य पर बेच दिया जाता है. यह झूले की तरह होता है. एक तरफ से आता है फिर दूसरी तरफ जाता है. इसलिये जब निचले स्तर पर मूल्य आने पर लोग खरीद लिया करते हैँ और जब मूल्य उपरी सीमा तक चहुँपता है तो बेच दिया जाता है. यह उदाहरण सिर्फ इसलिये दिया गया है कि आम ट्रेडर शॉर्ट सेल नहीं कर सकता, या उसे करने नहीं दिया जाता क्योंकि शॉर्ट सेलिंग बहुत जोखिम वाला काम होता है. 

लांग बाई उसको कहते हैं जब आपके पास पूंजी कम होती है ओर खरीदे गये शेयरों का मूल्य अधिक होता है. इस कमी को ब्रोकर आपको मार्जिन देकर पूरा कराते है.
शॉर्ट सेल उसको कहते हैं जब आपके पास शेयर नहीं होते फिर भी आप उसे बेच देते हैं. 

मान लीजिये कि आपने 1000 रुपये के शेयर लांंग बाई किया है और खरीदने के बाद इसका मूल्य नीचे जाने लगता है तब आपका अधिकतम नुकसान 1000 रुपये तक का ही होगा. जबकि लाभ की सीमा नहीं होती. मूल्य कितना भी बढ़ जाय. मगर यदि आपने उस शेयर को 1000 रु में बेच दिया है जो आपके पास है ही नहीं तब आपको अधिकतम लाभ 1000 रुपये तक का ही हो सकता है मगर नुकसान असीम हो जाता है क्योंकि उस का मूल्य किसी सीमा तक चढ़ सकता है. 

फ्यूचर और आप्शन के आप्शन ट्रेड में बिकवाल कॉल आप्शन बेचते हैं जबकि लिवाल पुट आप्शन. इसके ठीक उलट आम वणिक या ट्रेडर आप्शन खरीदता है. आप्शन बेचने वाले को असीम नुुकसान हो सकता है पर अधिकतम लाभ उतना ही होगा जितने पर उसने वह आप्शन बेचा है. जबकि आप्शन खरीदने वाले के लिये अधिकतम नुकसान उतना ही हो सकता है जितने पर उसने वह आप्शन खरीदा है जबकि उसके लाभ की कोई सीमा नहीं होती. 

सवाल उठता है कि तब अधिकतम आप्शन खरीददार नुकसान में कैसे रहते हैं और अधिकतम आप्शन विक्रेता मुनाफे में? वह इसलिये कि आप्शन की कीमत गुजरते समय के साथ घटती जाती है. मान लीजिये कि किसी ने 25000 स्ट्राइक रेट का आप्शन बेचा है तो यदि मूल्य उसके नीचे गिरता है तो बेचने वाला फायदे में रहता है. और यदि मूल्य स्थिर रह गया तब भी आप्शन का मूल्य घटता जाता है और बेचने वाला फायदे में रहता है. जबकि आप्शन खरीदने वाले के लिये यह इस के विपरीत होता है.  

कैंडल चार्ट के विश्लेषण के लिये तरह तरह के संकेतक यानि  इंडिकेटर उपयोग में लाये जाते है. हर इंडिकेटर का वर्णन इस लेख की सीमा के बाहर है. मगर इतना हमेशा याद रखिये कि आजतक कोई इंडिकेटर ऐसा नहीं बना है जो हर बार सही साबित हो. दुर्भाग्य से अगर ऐसा कोई इंडिकेटर बन गया तो शेयर बाजार का वह आखिरी दिन होगा. इसलिये हर इंडिकेटर कई बार सही होता है और कई बार गलत. 

इसीलिये वणिक यानि कि ट्रेडर तरह तरह की रणनीति - स्ट्रेटेजी - बनाते हैं. इनके साथ भी वही बात सही है जो इंडिकेटरों के लिये. कोई भी रणनीति हर बार सफल नहीं होती, हो भी नहीं सकती. 

इसलिये आप कोई भी इंडिकेटर - संकेतक - चुनिए, कोई भी रणनीति बनाईए आप हमेशा सही साबित नहीं हो  सकते. 

इसी लिये वणिक रिस्क रिवार्ड अनुपात की बात करते हैँ. यह रिस्क रिवार्ड अनुपात भी हर वणिक के लिये अलग हो सकता है, अलग होना भी चाहिये. अगर  आप असफल होकर एक रुपये का नुकसान उठाते हों और सफल होने पर एक से ज्यादा का मुनाफा होता है तो अधिक बार गलत होकर भी आप फायदे में रह सकते हैं. मगर अगर आपने गलत रिस्क रिवार्ड अनुपात का चयन किया है तो आपको नुकसान होने की संभावना ज्यादा होती है. 

आज का लेख कुछ लंबा हो गया और फिर भी सारी बातें चर्चा में नहीं आ पाईं. हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता वाली शैली में कहें तो शेयर बाजार एक अबूझ पहेली है. 

आप अपने प्रश्न पूछिए. कोशिश करुंगा कि आपको उत्तर दे पाऊँ. पर आपके हर प्रश्न का उत्तर मैं नहीं दे पाऊँगा क्योंकि बहुत से प्रश्न ऐसे हैं जिनका उत्तर मैं स्वयं खोज रहा हूं. मैं आपको कोई सलाह नहीं देता, दे भी नहीं सकता क्योंकि स्वंय लाखों का नुकसान उठा चुका हूँ और मैं न तो प्रशिक्षित और प्रमाणित विश्लेषक हूं न सलाहकार. क्या खरीदें क्या बेचें, कब खरीदें कब बेचें यह सब आप जानिए. जानने की कोशिश करिए. पूंजी आपकी होगी, फैसला आप का होगा, और लाभ हानि भी आपकी ही होगी.

हर वणिक को अपनी शैली बनानी पड़ती है कि किस संकेतक का उपयोग करेगा, किस रणनीति का उपयोग करेगा, किस तरह की ट्रेडिंग करेगा. जो मेरे लिए सही है वह आपके लिए भी सही ही हो इसकी संभावना बहुत कम होती है. सत्य एक ही है पर विद्वान उसका अलग अलग वर्णन करते है. विप्र बहुधा वदन्ती !

Saturday, October 11, 2025

कोई लाख करे चतुराई करम के लेख मिटे ना भाई.

कोई लाख करे चतुराई करम के लेख मिटे ना भाई.
जरा समझो इसकी सचाई करम केे लेख मिटे ना भाई.
इस दुनिया में भाग्य केे आगेे चले ना किसी का पार.
कागद हो तो हर कोई बाँचेे करम ना बाँचा जाय.
एक दिन इसी किस्मत के कारण बन को गयेे थेे रघुराई.
करम का लेेख मिटे ना भाई.

अक्सर जब मैं कोई लेख लिखने चलता हूं तो कुछ देर उस विषय पर मंथन करता हूं और उसका सार निचोड़ अगर किसी बढ़िया गीत के मुखड़े सेे या किसी पुरानी कहावत सेे मेल खा जाती है तो मैं उसी को अपने लेेख का मथैला बना लेेता हूं. आज भी वही मथैला हैै पर चरचा मैं भक्ति की नहीं, वाणिकी - ट्रेडिंग - की करने जा रहा हूं कि -
कोई लाख करे चतुराई करम के लेख मिटे ना भाई.  

वाणिकी में यह उक्ति सटीक बैठती है कि - 
होनी तो हो कर रहे, अनहोनी ना होय.
जिसको मारे साईंया बचा ना सकीहें कोय.

पर इन उक्तियों या सचाई सेे मैं आपकि निराशा की तरफ नहीं ले जाना चाह रहा. मेरा कहना है कि मौत तो एक ना एक दिन आनी ही है. अगर मौत के खौफ मेंं जिन्दगी गुजार दोगे तो जिन्दगी का आनन्द नहीं ले पाओगे. मेरा तो यही मानना है कि जिसको मौत सेे डर लगता हैै उसको जीनेे का हक नहीं. अगर वाणिकी में आपको नुकसान होने का डर, पूंजी गँवाने का डर लगता है तो भईया वाणिकी करो ही क्यों!

जीना है तो मरना सीखो, कदम कदम पर लड़ना सीखो. अगर वाणिकी में लाभ कमाना है तो नुकसान के लिये तैयार रहना पड़ेगा. क्योंकि सिर्फ नुकसान ही आपके वश में हैै, लाभ होगा कि नहीं, होगा तो कितना होगा यह आपके वश में न होकर भाग्य यानि कि बाजार के वश मेंं होता है. गीता का श्लोक याद करिए -

कर्मण्ये वाधिकारस्ते, मा फलेषु कदाचन.
 
आपके अधिकार मेें सिर्फ कर्म है उसका परिणाम नहीं. वाणिकी में आपको संभावनाओं के सहारे चलना होता है और जब भी लाभ की संभावना दिखे आपको उस दिशा में बढ़ना होता है पर सौदा करने से पहले देख लीजिए कि नुकसान की संभावना कितनी है. उतना नुकसान आप सहन कर पाऐंगे क्या? एक बार जब आप उस नुकसान की संभावना को स्वीकार कर लेते हैं तो लाभ आपके कदम चूमनेे की प्रतीक्षा में होगी. 

आज मैं एक रणनीति की बात करूंगा जिसका उपयोग आप किसी भी तरह की शेयर वाणिकी में कर सकते है, कमोडिटी हो, करेंसी हो, इक्विटी हो, बुलियन हो, या आप्शन ट्रेेडिंग. हर जगह थोड़ा बहुत परिवर्तन कर केे इसका उपयोग किया जा सकता है.

मैँ स्वंय तो आप्शन खरीदने वाला हूं और यह रणनीति मूलत: उसी के लिये बनाई है. पर सोचा कि अधिकतर लोग इक्विटी में वाणिकी करते हैं क्योंकि उन्हे बताया गया है कि इक्विटी वाणिकी में नुकसान होने की संभावना कम होती है. यह सचाई भी है पर यह भी उतना ही सच है कि जितना जोखिम उतना फायदा. कम जोखिम वाले काम में लाभ भी कम ही होता है क्योंकि नुकसान की संभावना कम होती है. पर अधिक लाभ कमाना हो तो फिर अधिक जोखिम के लिए भी तइयार होना पड़ेेगा. अब यह आप पर निर्भर करता है. पर पंचों की राय सिर माथेे रखते हुए मैैं उसी रणनीति में थोड़ा बहुत फेर बदल कर आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूं.

पर उससे पहले चेतावनी - 
मैैं न तो निवेश सलाहकार हूं न शोध विश्लेेषक. जो कुछ भी मै बताना चाहता हूं वह अपने अनुभव से सीखा है. लाखों का नुकसान उठाने के बाद, बरसों का अनुभव प्राप्त करने केे बाद आज मैं अपना अनुभव आपसेे साझा कर सकता हूँ. पर आप मेरेे अनुभव को मान लें यह जरुरी नहीं. रुपये आपके लगेेंगे, लाभ आपको होगा तो नुकसान भी आपही का होगा. मेरा कुछ नहीं जाता. मैं तो फकीर हूं किसी भी दिन झोला उठाकर चल दूंगा ;-)

हर स्टॉक का एक खास अंदाज होता है. कुछ तेेजी सेे बढ़ते या गिरते हैं, कुछ बहुत सुस्ती सेे. वाणिकी करना हो तो आपको वैैसेे स्टॉक चुनने होंगे मेें जिनमें वोलेेटिलिटी, बड़ा उछाल-गिरावट वाला, हो और जिसे बड़ी संख्या में खरीदा या बेचा जाता है.

अगर आप निवेशक हैं तो यह लेख आपके काम का नहीं. आप यहीं से वापस जा सकते हैं. मगर अगर आप वाणिकी सेे अपनी आय बढ़ाना चाहते हों तो बने रहिए. वाणिकी के लिए आपको कई एक स्टॉक के शेेयर खरीदने की जरुरत नहीं. आप किसी भी एक स्टॉक को चुन सकते हैं जिसमेंं वोलेटिलिटी और लिक्विडिटी रहती हो. उदाहरण के लिये मैं कोई भी नाम नहीं दूंगा. यह फैसला आपको करना होगा.

मान लीजिए आपने एक स्टॉक चुन लिया. अब आपको सिर्फ वही एक स्टॉक खरीदना या बेचना है. अब उसकी लिक्विडिटी देखिए कि क्या उस स्टॉक में रोज कम सेे कम दस करोड़ रुपयों का सौदा होता है. अब अगला कदम यह जानना है कि उस स्टॉक के लिये सर्किट कितनेे प्रतिशत के बदलाव पर लगता है. कुछ में यह दो प्रतिशत तो कुछ मे बीस प्रतिशत तक का होता है. अगर सर्किट कम का है तो मान कर चलिए कि वह  स्टॉक वोलाटाइल भी है.

मान लीजिये आपने जिस स्टॉक को वाणिकी के लिये चुना उसका सर्किट पाँच फीसदी का है. आगे का काम अगर आपके पास कोई चार्टिंग सॉफ्टवेेयर तो काम आसान हो जाएगा. यहाँ मैं मान कर चल रहा हूं कि आपके पास न तो ऐसा कोई सॉफ्टवेेयर है, न आप टेक्निकल चार्ट की भाषा जानते हैैं. आपको उस शेेयर का दाम पिछली दीपावली के दिन हुए मुहुरत का आखिरी भाव देखना है. 

अब उस भाव को पाँच प्रतिशत, बेेहतर होगा दस प्रतिशत के चरणों मेें बढ़ाते जाइए. मान लीजिए कि उस दिन वह स्टॉक 317 रुपये पर बन्द हुआ था. अब इसे दस प्रतिशत केे चरण मेें बढ़ाते जाइए. गणना की सुविधा केे लिए मैैं तीस रुपये का चरण तय करूंगा अगली दीपावली मुहुरत के दिन तक के लिए. सो चरण बने -
317, 347, 377, 407. यह गणना आगेे तक जा सकती है पर सरल भाव में मै यह मान लेता हूं कि इस स्टॉक का शेयर 396 पर है. सब कुछ काल्पनिक है. अलग अलग स्टॉक के लिए गणना भी अलग अलग होगी. मैैं यहां सिर्फ एक उदाहरण दे रहा हूं.

अब अगर आज आप इसको खरीदना चाहते हेैँ तो आप को 396-377 यानी कि 19 रुपए का नुकसान हो सकता है. और आप सिर्फ नुकसान का अनुमान लगा सकते हैं. लाभ का अनुमान लगाने की जरूरत नहीं और आपको करना भी नहीं चाहिए. 

अब आप इस सौदे में तब तक बने रहिए जब तक यह 407 तक नहीं पंहुच जाता. यानि कि मात्र 11 रुपए का लाभ. पहली नजर में आपको लगेगा कि 19 रुपयों का जोखिम उठाकर मात्र 11 रुपये का लाभ. ना बाबा नहीं करना ऐसा  सौदा! पर मैैंनेे यह कब कहा कि आप यहाँ निकल जाईए. मैंने तो यही बताया कि तब तक बने रहिए.

अब अगर यहां तक मेेरी बात आपको समझ में आ गई है तो अगले चरण की तरफ बढ़ता हूं. कोई भी सौदा उतने ही शेयर का करना चाहियेे जितना नुकसान उठाकर भी आप बाजार में बने रह सकते है. यह सौदा कितनेे का होगा या होना चाहिए अब इसकी चरचा करें. फिर मान लीजिए कि आप किसी भी सौेदे मेें अधिकतम एक हजार रुपयेे का नुकसान उठा सकते हैं तो आपको उस स्टॉक के 1000/19  (नुकसान की सीमा को नुकसान की संभावना से विभाजित करके) मात्र पाँच शेयर खरीदने चाहिए. 

उदाहरण केे लिए मैैं इसेे छह शेयर मान कर चलता हूं. अब जब आप के शेयर का भाव 407 रुपये पर आ गया तो यहाँ आप तीन शेेयर बेच दीजिए. बाकी बचे तीन शेयर छोड़ दीजिए स्टॉप लॉस पर कटने के लिए. 

जब भाव 437 पर आ जाय तो आपका स्टॉप लॉस अब 407 पर आ जाएगा. 467 पर आ जाय तो आपका स्टॉप लॉस 437 पर आ जाएगा. इस तरह आपका यह सौदा कभी भी कटेगा तो लाभ देकर ही. सिर्फ पहला चरण ही कठिन होता हेै जब आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.

आशा है आपको यह रणनीति लाभदायक लगी होगी. अगर आपको कुछ प्रश्न बनते हों तो आप नीचे कमेेंट कर सकते हैं. कोशिश करूंगा कि आपके प्रश्नों का उत्तर यथाशीघ्र दे सकूं.


बैठा बनिया क्या करे, इस डेहरी से उस डेहरी में

बात आगे बढ़ाऊँ उससे पहले रहीम का एक दोहा याद दिला रहा हूं। रहीम जी ने कहा था - रहिमन चुप ह्वै बैठिए देखि दिनन को फेर। जब नीके दिन आइहें बनत ...