कोई लाख करे चतुराई करम के लेख मिटे ना भाई.
जरा समझो इसकी सचाई करम केे लेख मिटे ना भाई.
इस दुनिया में भाग्य केे आगेे चले ना किसी का पार.
कागद हो तो हर कोई बाँचेे करम ना बाँचा जाय.
एक दिन इसी किस्मत के कारण बन को गयेे थेे रघुराई.
करम का लेेख मिटे ना भाई.
अक्सर जब मैं कोई लेख लिखने चलता हूं तो कुछ देर उस विषय पर मंथन करता हूं और उसका सार निचोड़ अगर किसी बढ़िया गीत के मुखड़े सेे या किसी पुरानी कहावत सेे मेल खा जाती है तो मैं उसी को अपने लेेख का मथैला बना लेेता हूं. आज भी वही मथैला हैै पर चरचा मैं भक्ति की नहीं, वाणिकी - ट्रेडिंग - की करने जा रहा हूं कि -
कोई लाख करे चतुराई करम के लेख मिटे ना भाई.
वाणिकी में यह उक्ति सटीक बैठती है कि -
होनी तो हो कर रहे, अनहोनी ना होय.
जिसको मारे साईंया बचा ना सकीहें कोय.
पर इन उक्तियों या सचाई सेे मैं आपकि निराशा की तरफ नहीं ले जाना चाह रहा. मेरा कहना है कि मौत तो एक ना एक दिन आनी ही है. अगर मौत के खौफ मेंं जिन्दगी गुजार दोगे तो जिन्दगी का आनन्द नहीं ले पाओगे. मेरा तो यही मानना है कि जिसको मौत सेे डर लगता हैै उसको जीनेे का हक नहीं. अगर वाणिकी में आपको नुकसान होने का डर, पूंजी गँवाने का डर लगता है तो भईया वाणिकी करो ही क्यों!
जीना है तो मरना सीखो, कदम कदम पर लड़ना सीखो. अगर वाणिकी में लाभ कमाना है तो नुकसान के लिये तैयार रहना पड़ेगा. क्योंकि सिर्फ नुकसान ही आपके वश में हैै, लाभ होगा कि नहीं, होगा तो कितना होगा यह आपके वश में न होकर भाग्य यानि कि बाजार के वश मेंं होता है. गीता का श्लोक याद करिए -
कर्मण्ये वाधिकारस्ते, मा फलेषु कदाचन.
आपके अधिकार मेें सिर्फ कर्म है उसका परिणाम नहीं. वाणिकी में आपको संभावनाओं के सहारे चलना होता है और जब भी लाभ की संभावना दिखे आपको उस दिशा में बढ़ना होता है पर सौदा करने से पहले देख लीजिए कि नुकसान की संभावना कितनी है. उतना नुकसान आप सहन कर पाऐंगे क्या? एक बार जब आप उस नुकसान की संभावना को स्वीकार कर लेते हैं तो लाभ आपके कदम चूमनेे की प्रतीक्षा में होगी.
आज मैं एक रणनीति की बात करूंगा जिसका उपयोग आप किसी भी तरह की शेयर वाणिकी में कर सकते है, कमोडिटी हो, करेंसी हो, इक्विटी हो, बुलियन हो, या आप्शन ट्रेेडिंग. हर जगह थोड़ा बहुत परिवर्तन कर केे इसका उपयोग किया जा सकता है.
मैँ स्वंय तो आप्शन खरीदने वाला हूं और यह रणनीति मूलत: उसी के लिये बनाई है. पर सोचा कि अधिकतर लोग इक्विटी में वाणिकी करते हैं क्योंकि उन्हे बताया गया है कि इक्विटी वाणिकी में नुकसान होने की संभावना कम होती है. यह सचाई भी है पर यह भी उतना ही सच है कि जितना जोखिम उतना फायदा. कम जोखिम वाले काम में लाभ भी कम ही होता है क्योंकि नुकसान की संभावना कम होती है. पर अधिक लाभ कमाना हो तो फिर अधिक जोखिम के लिए भी तइयार होना पड़ेेगा. अब यह आप पर निर्भर करता है. पर पंचों की राय सिर माथेे रखते हुए मैैं उसी रणनीति में थोड़ा बहुत फेर बदल कर आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूं.
पर उससे पहले चेतावनी -
मैैं न तो निवेश सलाहकार हूं न शोध विश्लेेषक. जो कुछ भी मै बताना चाहता हूं वह अपने अनुभव से सीखा है. लाखों का नुकसान उठाने के बाद, बरसों का अनुभव प्राप्त करने केे बाद आज मैं अपना अनुभव आपसेे साझा कर सकता हूँ. पर आप मेरेे अनुभव को मान लें यह जरुरी नहीं. रुपये आपके लगेेंगे, लाभ आपको होगा तो नुकसान भी आपही का होगा. मेरा कुछ नहीं जाता. मैं तो फकीर हूं किसी भी दिन झोला उठाकर चल दूंगा ;-)
हर स्टॉक का एक खास अंदाज होता है. कुछ तेेजी सेे बढ़ते या गिरते हैं, कुछ बहुत सुस्ती सेे. वाणिकी करना हो तो आपको वैैसेे स्टॉक चुनने होंगे मेें जिनमें वोलेेटिलिटी, बड़ा उछाल-गिरावट वाला, हो और जिसे बड़ी संख्या में खरीदा या बेचा जाता है.
अगर आप निवेशक हैं तो यह लेख आपके काम का नहीं. आप यहीं से वापस जा सकते हैं. मगर अगर आप वाणिकी सेे अपनी आय बढ़ाना चाहते हों तो बने रहिए. वाणिकी के लिए आपको कई एक स्टॉक के शेेयर खरीदने की जरुरत नहीं. आप किसी भी एक स्टॉक को चुन सकते हैं जिसमेंं वोलेटिलिटी और लिक्विडिटी रहती हो. उदाहरण के लिये मैं कोई भी नाम नहीं दूंगा. यह फैसला आपको करना होगा.
मान लीजिए आपने एक स्टॉक चुन लिया. अब आपको सिर्फ वही एक स्टॉक खरीदना या बेचना है. अब उसकी लिक्विडिटी देखिए कि क्या उस स्टॉक में रोज कम सेे कम दस करोड़ रुपयों का सौदा होता है. अब अगला कदम यह जानना है कि उस स्टॉक के लिये सर्किट कितनेे प्रतिशत के बदलाव पर लगता है. कुछ में यह दो प्रतिशत तो कुछ मे बीस प्रतिशत तक का होता है. अगर सर्किट कम का है तो मान कर चलिए कि वह स्टॉक वोलाटाइल भी है.
मान लीजिये आपने जिस स्टॉक को वाणिकी के लिये चुना उसका सर्किट पाँच फीसदी का है. आगे का काम अगर आपके पास कोई चार्टिंग सॉफ्टवेेयर तो काम आसान हो जाएगा. यहाँ मैं मान कर चल रहा हूं कि आपके पास न तो ऐसा कोई सॉफ्टवेेयर है, न आप टेक्निकल चार्ट की भाषा जानते हैैं. आपको उस शेेयर का दाम पिछली दीपावली के दिन हुए मुहुरत का आखिरी भाव देखना है.
अब उस भाव को पाँच प्रतिशत, बेेहतर होगा दस प्रतिशत के चरणों मेें बढ़ाते जाइए. मान लीजिए कि उस दिन वह स्टॉक 317 रुपये पर बन्द हुआ था. अब इसे दस प्रतिशत केे चरण मेें बढ़ाते जाइए. गणना की सुविधा केे लिए मैैं तीस रुपये का चरण तय करूंगा अगली दीपावली मुहुरत के दिन तक के लिए. सो चरण बने -
317, 347, 377, 407. यह गणना आगेे तक जा सकती है पर सरल भाव में मै यह मान लेता हूं कि इस स्टॉक का शेयर 396 पर है. सब कुछ काल्पनिक है. अलग अलग स्टॉक के लिए गणना भी अलग अलग होगी. मैैं यहां सिर्फ एक उदाहरण दे रहा हूं.
अब अगर आज आप इसको खरीदना चाहते हेैँ तो आप को 396-377 यानी कि 19 रुपए का नुकसान हो सकता है. और आप सिर्फ नुकसान का अनुमान लगा सकते हैं. लाभ का अनुमान लगाने की जरूरत नहीं और आपको करना भी नहीं चाहिए.
अब आप इस सौदे में तब तक बने रहिए जब तक यह 407 तक नहीं पंहुच जाता. यानि कि मात्र 11 रुपए का लाभ. पहली नजर में आपको लगेगा कि 19 रुपयों का जोखिम उठाकर मात्र 11 रुपये का लाभ. ना बाबा नहीं करना ऐसा सौदा! पर मैैंनेे यह कब कहा कि आप यहाँ निकल जाईए. मैंने तो यही बताया कि तब तक बने रहिए.
अब अगर यहां तक मेेरी बात आपको समझ में आ गई है तो अगले चरण की तरफ बढ़ता हूं. कोई भी सौदा उतने ही शेयर का करना चाहियेे जितना नुकसान उठाकर भी आप बाजार में बने रह सकते है. यह सौदा कितनेे का होगा या होना चाहिए अब इसकी चरचा करें. फिर मान लीजिए कि आप किसी भी सौेदे मेें अधिकतम एक हजार रुपयेे का नुकसान उठा सकते हैं तो आपको उस स्टॉक के 1000/19 (नुकसान की सीमा को नुकसान की संभावना से विभाजित करके) मात्र पाँच शेयर खरीदने चाहिए.
उदाहरण केे लिए मैैं इसेे छह शेयर मान कर चलता हूं. अब जब आप के शेयर का भाव 407 रुपये पर आ गया तो यहाँ आप तीन शेेयर बेच दीजिए. बाकी बचे तीन शेयर छोड़ दीजिए स्टॉप लॉस पर कटने के लिए.
जब भाव 437 पर आ जाय तो आपका स्टॉप लॉस अब 407 पर आ जाएगा. 467 पर आ जाय तो आपका स्टॉप लॉस 437 पर आ जाएगा. इस तरह आपका यह सौदा कभी भी कटेगा तो लाभ देकर ही. सिर्फ पहला चरण ही कठिन होता हेै जब आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.
आशा है आपको यह रणनीति लाभदायक लगी होगी. अगर आपको कुछ प्रश्न बनते हों तो आप नीचे कमेेंट कर सकते हैं. कोशिश करूंगा कि आपके प्रश्नों का उत्तर यथाशीघ्र दे सकूं.
Itishri is a Hindi word which means 'The End". Here too you will find many posts which should end your prejudices, fears, ignorance, as well as greed. We Never recommend any particular stock to buy or to sell. It is strongly underlined that no indicator or strategy is full-proof. Share trading is a match between two teams - buyers and sellers - and no one can predict who will be winner.
Saturday, October 11, 2025
कोई लाख करे चतुराई करम के लेख मिटे ना भाई.
Thursday, October 2, 2025
वणिकों का सबसेे घातक दुश्मन : आशा
वणिकों का सबसेे घातक दुश्मन : आशा
HOPE-WORST-ENEMY-OF-TRADERS
वणिकों का सबसेे घातक दुश्मन उनकी आशा होती है और यह जानते हुए भी अधिकतर वणिक - ट्रेडर - स्टॉक ट्रेडर - उसी आशा से चिपके रहते हैं इस उम्मीद मेे कि शायद उनको नया जीवन मिल जाय.
मैं हर बार बताता हूं कि मैं न तो निवेश सलाहकार हूं न अनुसंधानकर्ता न विश्लेषक. और मैं कोशिश करता हूं कि कभी किसी चरचा में किसी स्टॉक विशेष का नाम न लूं. फिर भी कुछ मित्र परिचित गाहे बगाहे मेरी सलाह मांगते ही रहते है. शायद उनको लगता है कि मैं एक अनुभवी वणिक हूं और मैं हर स्थिति से गुजरा हुआ हूं. वो जानना चाहते हैं कि उनुका एक ट्रेेड बहुत ही गलत चला गया है और वह उससे निकलने या निपटने में मेेेरे विचार जानना चाहता हूं. यह सारी चरचा अनौपचारिक होती है और इसमें कोई लेनदेन नहीं होता. अधिकतर मामलों मेें जिस स्टॉक के बारे मेें राय मांगी जाती है उस स्टॉक विशेेष में मैं सक्रिय नहीं होता. कई बार तो उस स्टॉक का नाम भी पहली बार सुन रहा होता हूं.
हर वणिक अपना सबसेे बड़ा दुश्मन स्वंय होता है. उसेे अच्छी तरह याद रहता है कि शिकारी आएगा, जाल बिछाएगा, लोभ से उसमें फंंसना नही. और वह उस सलाह को दुहरातेे हुए किसी न किसी जाल मेें फँसता रहता हैै. आज तक ऐसा कोई वणिक नहीं हुआ जिसनेे नुकसान न उठाया हो. शेयर बाजार का शाश्वत सत्य ही यही है कि बाजार में कुछ भी कभी भी हो सकता है. कबीर जैैसेे लोग भी कहतेे आए हैं कि डूबा वंश कबीर का उपजा पूत कमाल. अलग बात है कि कमाल मेंं भी संभावनायें होती हैं. और उसकी सलाह भी बहुत काम की मिलती है. जैसेे कि -
चलती चक्की देेख कर हँसा कमाल ठठाय,
कील पकड़ कर जो रहेे कभी ना पीसा जाय.
हर वणिक अगर कील से - बाजार की धुरी सेे, खुद की बनाई रणनीति सेे - चिपका रहे तो अंततोगत्वा उसकी जीत ही होती हैै. मगर वह अक्सर अपनी रणनीति को नजरअंदाज कर देता है और बाद मेें सोचने लगता हैै कि इस जाल सेे निकलेे कैसेे!
आगे बढ़ने सेे पहलेे इस तथ्य को रेेखांकित करना जरुरी है कि ऐसा होता क्यों है. उसेे लगता हैै कि वह हमेशा सही रहता हैै (रहता नहीं पर उसेे अपनी गलतियां याद नहीं रहतीं अपना सही होना याद रहता हैै) और इस बार भी वह सही ही साबित होगा. उसका इगो उसे वास्तविकता स्वीकार करने सेे रोक देता है और वह अपनी आशा से चिपक जाता है कि बस अब बाजार पलटने ही वाला है, इस कैंडल मेेंं नहीं तो अगलेे कैंडल में. बाजार पलटता नहीं और वणिक अपने ही बनाए दलदल मेें लगातार धँसता चला जाता है.
किसी भी गलत सौदे से निकलने या निपटनेे का एक ही तरीका होता है - अपनी गलती मानो और सौदा तोड़ दो! जितनी जल्दी स्वीकार कर सको और सौदा काट सको उतना ही बढ़िया. आशा उम्मीद वणिक के लिये जहर होती हैै. और यह जहर जैसेे जैसे अपना असर बढ़ाता जाता है वैैसे वैसे वह इस जहर की खुराक बढ़ाता जाता हैै.
जो वणिक इस वास्तविकता को स्वीकार कर लेता है वह अंत मेेें विजयी हो कर निकलता हैै. क्योंकि हर सौदा ट्रेेड नहीं हुआ करता. कई सौदेे मिल कर ट्रेेेड बनते हैं. कई बार दस में से तीन बार ही सही रहनेे वाले वणिक भी बहुत लाभ कमा लेतेे हैं और अधिकतर सही रहनेे वाला वणिक नुकसान मेें रहता है. अंतर यही है कि पहली तरह का वणिक अपने दंभ में नहीं रहता, आशा के भरोसेे नहीं रहता. जैसे ही उसेे सौदा गलत होनेे का आभास होता है वह सौदा तोड़ देता हैै. दूसरी तरह का वणिक ऐसा नहीं कर पाता और अपने गलत हो चुके सौदे सेे चिपका रह जाता हैै.
कई वणिक नुकसान उठाने को तैयार नहीं हो पाते. वह चाहते हैं कि कोई ऐसा उपाय हो जिससेे इस नुकसान को कम किया जा सकेे. उसे हर सौदा जीतना होता हैै भले इस क्रम में वह अपने ट्रेेड में गलत साबित हो जाय!
और आज ऐसेे ही सौदे सेे सही सलामत निकलनेे की प्रक्रिया की चरचा करने जा रहा हूं इस लेेख में. पूरा पढ़िए और अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दीजिए.
मैैंने आज ऐसे ही किसी स्टॉक को गूगल किया तो एक उदाहरण मेेरे सामने आया. इस स्टॉक का नाम मैंने कभी नहीं सुना था और शायद आप भी नहीं जानतेे होंगे. आज मैं उस स्टॉक का चार्ट तो दिखलाऊंगा पर उसका नाम नहीं बताऊंगा. यह एक वास्तविक चार्ट और एकदम ताजा. आज तक का ही है. यह स्टॉक ऐसेे गलत सौदों का एक सटीक उदाहरण हैै. सबसेे पहलेे तो इसका शुरु सेे आज तक का चार्ट देखिए. फर्श सेे शुरु होकर इसको कितनी तेजी से अर्श तक पहुँचाया जाता हैै वह भी देख लीजिए. एक नया नया लिस्टेेड शेयर महीनों तक अपर सर्किट मेे फसा रहता है और नये नये लोग इसका सौदा करतेे चले जाते हैैं. मगर जिस खिलाड़ी नेे या जिन खिलाड़ियों नेे यह खेल शुरु किया था उन्हें अच्छी तरह मालूम था कि कहां निकल जाना है. उसके बाद जो होता है वह भी आपके सामने है. इस चार्ट को दो हिस्सों मेे देखिए. पहला भाग पहली पहाड़ी मेें नजर आता हैै.
पर असल खेेल दूसरेे चरण मेें खेेला जाता है. लोगों कि इस खंडहर का
अतीत याद रहता है और उन्हें लगता है कि यह फिर अपना शिखर छू ही लेगा. और जब
दूसरी बार यह खेल शुरु होता हैै तो इस बार बड़ेे बड़ेे वणिक (हो सकता है
कि बड़ा वणिक होना उनका भ्रम ही हो) भी इसमे फँस जाते हैं. दूसरों की सलाह
पर ट्रेड करने वाले तो फँसने केे लिए होतेे ही है.
इस दूसरी पहाड़ी
का ढलान जब अंत होता नहीं नजर आता तब सोचने लगता है कि कहां फँस गया! अब
इससे निकलूं कैैसेे? दो चार दस फीसदी का नुकसान लेकर निकल जाना होता तो
निकल भी जाते पर जब नुकसान साठ सत्तर फीसदी का हो तो हिम्मत नहीं हो पाती.
और इसके कई उदाहरण भी बाजार मेें दिखते रहते है कि आप जैैसेे ही इस स्टॉक
सेे निकलतेे हैं यह उड़ान भरना शुरु कर देता है!
आज इस लेख में
मैै इसी स्थिति की चरचा करने जा रहा हूं. जब भी ऐसी स्थिति बन जाय कि आप भी
मानने लगें कि इस सौदे मेें फंस गया हूं तो जितनी जल्दी निकल जाईए उतना ही
अच्छा. पर अगर आप चाहते हों को आप अपनी पूरी पूंजी भी बचा लेें और इससेे
मुक्ति भी पा लेें तब आपको हर उछाल में बेचना और बाद मेें आनेे वालेे
गिरावट में खरीद लेनेे का क्रम चलाना पड़ेेगा. जब भी उछाल केे बाद गिरावट
मिलेे पूरा सौदा काट दीजिए. पर इस सौदे को भूलिए मत. जब दुबारा गिर कर नये
उछाल की तइयारी करेे तब इसेे फिर खरीद लीजिए. बेचने से जितनी राशि मिली थी
उस पूरी राशि का उपयोग खरीदनेें मेें करना होगा. स्वाभाविक है कि आपने
जितनेे शेयर बेेचे होंंगे उससेे कुछ न कुछ अधिक शेयर खरीद लेेने की स्थिति
बनेगी. और यह अतिरिक्त शेयर ही आपका लाभ होगा. हर उछाल केे बाद पूरा सौदा
काटिए और जब उछाल के संकेत मिलें तब पूरी राशि से शेेेयर खरीद लेें. इस
क्रम में हर गिरावट पर आपके खरीदे शेेयरों की संख्या बढ़ती जाएगी और हर
उछाल में राशि की!
शेयर बाजार का क ख ग
शेयर बाजार का क ख ग मुझे गलतफहमी थी कि आज के युग में हर व्यक्ति को शेयर बाजार की आवश्यक जानकारी है. परन्तु एक व्यक्ति ने मेरी गलतफहमी दूर क...
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हिन्दी में इस शीर्षक को समझने के लिए अगर "डेड कैट बाउन्स" कहा जाय तो शेयर चर्चा करने वाले लोग सहजता से समझ लेंगे. कल और आज शेयर बा...


